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22 वर्षों के बाद होने लगा “गठबंधन वाले नेशनल हाइवे” का विस्तार, लोग डरे

22 वर्षों के बाद  होने लगा “गठबंधन वाले नेशनल हाइवे” का विस्तार, लोग डरे

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मंडी। वर्ष 1998 में हिमाचल प्रदेश में बीजेपी और हिविकां के गठबंधन की सरकार बनी। पंडित सुखराम के सहयोग से बनी इस सरकार में लोक निर्माण मंत्री बने धर्मपुर से विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर। तत्कालीन सरकार ने मंडी-कोटली-धर्मपुर-हमीरपुर-जालंधर सड़क को एनएच का दर्जा दिलाया। क्योंकि इस हाईवे से पंडित सुखराम, महेंद्र सिंह ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल का इलाका कवर हो गया, इसलिए इसे आम चर्चा में “गठबंधन वाले नेशनल हाइ-वे” का नाम दिया गया। हालांकि कागजों में यह नेशनल हाइ-वे 70 था जो अब नेशनल हाइ-वे-3 हो गया है। 22 वर्षों तक यह नेशनल हाइ वे कागजों में ही रहा और धरातल पर सिर्फ सिंगल रोड़ ही नजर आया। अब केंद्र सरकार ने इस हाइ-वे के विस्तार के लिए 1300 करोड़ की स्वीकृति दी है। हाइ-वे के विस्तारीकरण के लिए इन दिनों सर्वे का कार्य चला हुआ है और सर्वे के अनुसार पंडित सुखराम का गढ़ यानी तुंगल क्षेत्र का मुख्य बाजार कोटली उजड़ता हुआ नजर आ रहा है। यही कारण है कि यहां के दुकानदारों ने सर्वे के साथ ही अपना विरोध जताना भी शुरू कर दिया है। कोटली बाजार के दुकानदार देवराज और इंद्र सिंह सहित अन्यों का कहना है कि एनएच को कोटली बाजार से होकर न बनाया जाए बल्कि टनल या बाईपास से इसका निर्माण किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता फिर भविष्य में दुकानदार विरोध को तेज करने से गुरेज भी नहीं करेंगे।


अनुमान के अनुसार कोटली बाजार में 300 से अधिक दुकानें हैं। यह तुंगल क्षेत्र का मुख्य बाजार है। तहसील, पुलिस चैकी, स्कूल, कॉलेज और आईटीआई सहित संस्थान इसी बाजार में हैं। यदि सर्वे के अनुसार ही कोटली से होकर एनएच बनता है तो आधे से ज्यादा दुकानदार उजड़कर बेरोजगार हो जाएंगे। हजारों लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। यही कारण है कि अपने क्षेत्र के मुख्य बाजार को उजड़ता देख इलाके के लोग भी इसके विरोध में आकर खड़े हो गए हैं। पूर्व प्रधान लाल सिंह और जोद्ध सिंह का कहना है कि लोग एनएच के विस्तारीकरण के विरोध में नहीं है लेकिन इसे इस तरीके से बनाया जाना चाहिए कि कम से कम विस्थापन हो।

हिमाचल बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र गुलेरिया का कहना है कि कोटली बाजार को उजड़ने नहीं दिया जाएगा, इसके लिए चाहे जिस भी स्तर पर संघर्ष क्यों न करना पड़े। बहरहाल अभी हाईवे के विस्तारीकरण का सर्वे चला है और अभी इसमें बदलाव की गुंजाईश है। लेकिन यह सरकार की मंशा पर ही निर्भर करेगा कि कोटली बाजार को बचाने के लिए दूसरे विकल्पों को तलाशना है या फिर मौजूदा सर्वे से ही इसका निर्माण करवाना है।

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