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मन की बात में बोले मोदी – स्वच्छता के बाद जल संरक्षण के लिए भी चलाना होगा जन आंदोलन

मन की बात में बोले मोदी – स्वच्छता के बाद जल संरक्षण के लिए भी चलाना होगा जन आंदोलन

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 में मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आज पहली बार मन की बात कही। देशभर में बीजेपी के बूथ स्तर कार्यालयों में पीएम मोदी के इस संबोधन का लाइव प्रसारण किया गया। गृहमंत्री अमित शाह ने द्वारका के ककरोला स्टेडियम में इस कार्यक्रम को सुना। पीएम मोदी ने इस दौरान जल संरक्षण के मुद्दे पर प्रमुखता से बात की और लोगों के इसके लिए जागरूक (Aware) होने को कहा।

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पीएम ने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि एक लंबे अंतराल के बाद आपके बीच ‘मन की बात’, जन-जन की बात, जन-मन की बात का सिलसिला जारी कर रहे हैं। चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात (Maan ki bat) का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रही थी। हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे। कई सारे संदेश पिछले कुछ महीनों में आए हैं जिसमें लोगों ने कहा कि वो ‘मन की बात’ को मिस कर रहे हैं. जब मैं पढ़ता हूं, सुनता हूं मुझे अच्छा लगता है। मैं अपनापन महसूस करता हूं।

मोदी बोले – कई लोगों ने मुझे चुनाव की आपाधापी में, मैं केदारनाथ क्यों चला गया, बहुत सारे सवाल पूछे हैं. आपका हक है, आपकी जिज्ञासा भी मैं समझ सकता हूं। जब मैंने आखिर में कहा था कि हम तीन-चार महीने के बाद मिलेंगे, तो लोगों ने उसके भी राजनीतिक अर्थ निकाले थे और लोगों ने कहा कि अरे! मोदी जी का कितना विश्वास है, उनको भरोसा है।

लोकसभा चुनाव में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिया। 61 करोड़ – यह संख्या हमें बहुत ही सामान्य लग सकती है लेकिन अगर दुनिया के हिसाब से मैं कहूं तो अगर एक चीन को छोड़ दे तो भारत में दुनिया के किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लोगों ने वोटिंग किया था। 2019 का लोकसभा का चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था।

बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पूरी ताकत के साथ सत्ता में वापस आया है। 30 मई को नरेंद्र मोदी ने दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। अपने पहले शासनकाल में पीएम मोदी ने 53 बार मासिक कार्यक्रम के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया था।

जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे। मेरा पहला अनुरोध है – जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें। देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है। हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूं।

जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप #JanShakti4JalShakti के साथ शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके।

आपने कई बार मेरे मुंह से सुना होगा, ‘बूके नहीं बुक’, मेरा आग्रह था कि क्या हम स्वागत-सत्कार में फूलों के बजाय किताबें दे सकते हैं। मुझे हाल ही में किसी ने ‘प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियां’ नाम की पुस्तक दी। प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ कहानी का पात्र 4-5 साल का हामिद जब मेले से चिमटा लेकर अपनी दादी के पास पहुंचता है तो सच मायने में, मानवीय संवेदना अपने चरम पर पहुंच जाती है।

मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है। 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियां, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया। शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहां इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो, इतना बड़ा, योग ने रूप ले लिया है।

योग के क्षेत्र में योगदान के लिए Prime Minister’s Awards की घोषणा, अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी। यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है। जापान योग निकेतन’ को, इटली की Ms. Antonietta Rozzi को, बिहार योग विद्यालय, मुंगेर व कई अन्य संस्थाओं को Prime Minister’s Awards से सम्मानित किया गया।

हमारी यह यात्रा आज आरंभ हो रही है। नए भाव, नई अनुभूति, नया संकल्प, नया सामर्थ्य, लेकिन हां, मैं आपके सुझावों की प्रतीक्षा करता रहूंगा। आपके विचारों से जुड़ना मेरे लिए एक बहुत बड़ी महत्वपूर्ण यात्रा है। ‘मन की बात’ तो निमित्त है। आइए हम मिलते रहे, बातें करते रहे। आपके भावों को सुनता रहूं, संजोता रहूं, समझता रहूं. कभी-कभी उन भावों को जीने का प्रयास करता रहूं।

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