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झुनझुना थमा निकल लिए मोदी

झुनझुना थमा निकल लिए मोदी

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यशपाल शर्मा/ मंडी। प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमलावर बीजेपी के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली भले ही संजीवनी साबित हुई हो, लेकिन जनता को इससे जरा भी लाभ नहीं हुआ। प्रदेश के कोने-कोने से मोदी को सुनने आई जनता को अपने नेता से काफी उम्मीदें भी थीं, आम नागरिक भी पीएम के सत्ता पर काबिज होने के बाद पहली बार मंडी के पड्डल मैदान पर आने से आस बंधी थी, मगर खोदा पहाड़ और निकली चुहिया वाली कहावत ही चरित्रार्थ हुई। नरेंद्र मोदी प्रदेश को बाबा जी का ठुल्लू देकर चलते बने हैं। उन्होंने कोई भी घोषणा नहीं की, न ही भविष्य में कोई बड़ी सौगात देने का तानाबाना बुना। मोदी आए, जनता की भावनाओं से खेले, नतमस्तक हुए और विरोधियों को खरी-खोटी सुनाने के बाद अपनी पीठ थपथपा कर चलते बने।

  • modi-relly-mandi-8प्रदेश के लिए नहीं की कोई घोषणा, न मिली कोई सौगात
  • पुराने कामों का ही किया बखान, जुबानी जमा खर्च से लूटनी चाही वाहवाही

भारतीय सेना को पराक्रम के मामले में इजरायल की सेना के समक्ष खड़ा किया तो अपने प्रधानमन्त्री काल में किए कार्यों और पूर्व यूपीए सरकार की नाकामियों को एक-एक गिनाया। मोदी की रैली से भाजपाइयों में बेशक नए रक्त का संचार हो, लेकिन कुछ मिलने की आस लगाए बैठों को शायद ही ये प्रभावित कर पाई हो रैली में जुटी भीड़ और खर्च को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मंडी के बाज़ारों में कोई कह रहा है कि सार्वजनिक महत्व के केंद्रीय उपक्रमों यानि ऊर्जा परियोजनाओं का निर्माण करने वाली कंपनियों ने ही सारा खर्च उठाया है तो कोई इसे जनता के खून-पसीने की कमाई से हुई रैली बता रहा है। हो चाहे जो कुछ भी, पीएम जनता को अपने मोहपाश में बांधने की दिशा में बढ़ रहे हैं और आने वाले दिनों में वे अन्य संसदीय क्षेत्रों में रैलियां कर सत्तासीन कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।

dhumal1धूमल पर दिखा मोदी का आशीर्वाद

छोटी काशी के पड्डल मैदान पर राजनीति के अनेक रंग मंगल के दिन बिखरे। पीएम नरेंद्र मोदी के पहुंचने से पहले जहां सीएम वीरभद्र सिंह अपने काबीना मंत्रियों कौल सिंह, सुजान सिंह पठानिया, कर्ण सिंह और अफसरशाही के साथ उनके स्वागत को पहुंचे, वहीं बीजेपी की परिवर्तन रैली के मंच पर भी खूब सियासत देखने को मिली। पीएम के आने से पहले शिमला के सांसद बीरेंद्र कश्यप फिर अनुराग ठाकुर ने संबोधित किया। पूर्व सीएम व सांसद शांता कुमार पूरा भाषण नहीं दे पाए। उनके बोलना शुरू करने के थोड़ी देर बाद ही पीएम के काफिले के हेलीकॉप्टरों का उतरना शुरू हो गए। इससे उन्हें भाषण पूरा करने का मौका ही नहीं मिला। मंच पर भी वे अलग-थलग ही दिखे। उन्हें कुछ ख़ास तवज्जो नहीं मिली। उन्होंने भी ख़ास उत्साह नहीं दिखाया और मोदी की अगुवानी के लिए मंच से नीचे नहीं गए।

  • dhumal2पीएम ने मंच पर बैठे ही पूर्व सीएम को अपने बगल की सीट पर बिठाया
  • बीच में गुफ्तगू के दौरान कई बार खिलखिला कर हंसे दोनों
  • कांग्रेस सरकार से हिसाब मांगने का जिम्मा जनता पर छोड़ा
  • नड्डा का कद बढ़ा पर छाए रहे धूमल, दूर-दूर रहे शांता

पीएम के मंच पर पहुंचने के बाद धूमल छाए रहे। पीएम ने सीट पर बैठने के बाद जहां बाईं तरफ बैठे केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल को उठाकर धूमल को अपने पास बिठाया, वहीं वे उनसे काफी मंत्रणा करते भी दिखे। मोदी के दाईं और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बैठे हुए थे, इसलिए पीएम ने संतुलन साधने की भी कोशिश की। मगर मंच पर धूमल के साथ अनेक बार चर्चा करना और खिलखिला कर हंसना कई संकेत दे गया। यही नहीं मोदी ने अपने भाषण के दौरान धूमल के दिए फीडबैक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धूमल ने मुझे कांग्रेस सरकार से केंद्र द्वारा दिए जा रहे धन का हिसाब मांगने के लिए कहा है। वे कहते हैं कि हम ही क्यों हिसाब मांगेंगे, हिमाचल की जनता भी हिसाब मांगेगी, इसका उन्हें पूरा विश्वास है। बता दें कि नड्डा का कद बेशक राष्ट्रीय और प्रदेश की राजनीति में बढ़ा हो, इसलिए ही उनसे मोदी से पहले और धूमल के बाद भाषण कराया गया, लेकिन पीएम भी हिमाचल की सियासत में प्रेम कुमार धूमल की पकड़ को भली-भांति जानते हैं, जिसके मद्देनजर ही उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया गया।

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