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शिवदयाल के सपनों का घरौंदा बनाने में कुछ इस तरह से मददगार बनी ये योजना

शिवदयाल के सपनों का घरौंदा बनाने में कुछ इस तरह से मददगार बनी ये योजना

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कुल्लू। हर इंसान की इच्छा होती है कि उसका एक छोटा सा आशियाना हो, जिसमें वह अपने परिवार के साथ रहे। लेकिन हमारे आसपास बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनका यह सपना पूरा नहीं हो पाता और वे अपना एक घर बनाने के लिए सोचते रह जाते हैं। ऐसा ही सपना देखता था कुल्लू के शिवदयाल ने। शिवदयाल का जो घर था वो काफी पुराना व जर्जर हालत में था। खास तौर पर बरसात का मौसम उसके लिए किसी कहर से कम नहीं होता था। लकड़ी के कच्चे मकान में रिसने वाला पानी परेशानी का सबब तो था ही साथ ही 5 बच्चों की पढ़ाई अत्याधिक प्रभावित होती थी। घर में मेहमान आ जाए तो शिवदयाल के पास उनके आदर सम्मान के लिए बैठाने लायक जगह तक नहीं थी।

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बीपीएल परिवार से संबंध रखने वाले शिवदयाल ने पक्का मकान बनाने के लिए कई बार सोचा लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसके सपनों के घरौंदे की नींव रखना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना ने शि वदयाल और उसके परिवार के जीवन में एक नई उम्मीद जगाई। इस योजना के चलते न सिर्फ शिवदयाल का आशियाना मुकम्मल हुआ बल्कि परिवार को अब सिर छुपाने के लिए पक्का घर भी मिल गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने शिवदयाल के परिवार के चेहरे पर जहां नई मुस्कान ला दी वहीं अब शिवदयाल परिवार के साथ अपने पक्के मकान में जिंदगी के सुख-दुख बांट सकता है।

शिवदयाल के पास अब अपना पक्का मकान

शिवदयाल विकास खंड कुल्लू के ग्राम पंचायत पारली के झूणी गांव से बीपीएल परिवार से संबंध रखते हैं। उनके कच्चे मकान की हालात देखकर पंचायत की तरफ से उनको प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए चुना गया। सरकार की तरफ से 1.30 लाख की मदद मिलने और खुद की बचत से कुछ पैसा खर्च करने के बाद शिवदयाल के पास अब अपना एक पक्का मकान है। इसके साथ ही टायलेट बनाने के लिए भी सरकार की तरफ से 12 हजार रुपए सरकार ने जारी किए हैं। शिवदयाल बताते हैं कि यदि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार उनकी सहायता नहीं करती तो उनका पक्का मकान बनाने का सपना सपना ही रह जाता। उनका कहना है उनके कच्चे घर की छत भी लकड़ी की बनी थी जोकि सड़ने के कगार पर थी। ऐसे में छत से पानी रिसना आम बात थी, जिसके कारण घर में रखा सामान भी खराब हो जाता था, बच्चों को पढ़ाई करने के लिए कोई जगह नहीं बचती थी। घर में यदि कोई मेहमान आता तो चिंताएं और बढ़ जाती थी। शिवदयाल का कहना है कि ऐसे में प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कठिन समय में मेरे परिवार की सहायता करके हमें एक नई उम्मीद दी।

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