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आस्थाः यहां हर साल जौ समान बढ़ता है शिवलिंग का आकार

आस्थाः यहां  हर साल जौ समान बढ़ता है शिवलिंग का आकार

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स्वर्ग की दूसरी सीढ़ी है पौड़ीवाला शिवधाम, जुटेंगे हज़ारों शिव भक्त

नाहन। महाज्ञानी, विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद लंकापति रावण अमरता चाहता था। घोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उसे अमर होने का राज बताया। इसके बाद रावण ने यहां चमत्कारी सीढ़ी बना दी, लेकिन फिर भी उसका सपना पूरा नहीं हो पाया। इस मंदिर का इतिहास पांवटा-कालाअंब नेशनल हाइवे के किनारे नाहन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर मंदिर को जाने वाले रास्ते पर लगे बोर्ड पर भी दर्शाया गया है, ताकि यहां आने वाले लोगों को इसके ऐतिहासिकता का पता चल सके। पौड़ीवाला स्थित इस जगह में आज भी दूसरी पौड़ी विद्यमान है। कहते हैं कि पौड़ीवाला स्थित इस शिवमंदिर में साक्षात शिव शंकर भगवान वास करते हैं और यहां आने वाले हर श्रद्धालु की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। यहां हर साल शिवरात्रि पर मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। खास बात यह है कि हर साल यहां शिवलिंग का आकार जौ समान बढ़ता है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ जाती है। पौड़ीवाला शिव धाम हिमाचल के साथ साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के लोगों का भी आस्था का मुख्य केंद्र है।


क्या कहतीं हैं जन श्रुतियां
जनश्रुति के अनुसार हिमाचल के नाहन से लगभग पांच किलोमीटर दूर पौड़ीवाला शिव मंदिर का इतिहास लंकापति रावण के साथ जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि रावण ने अमरता प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। कहते हैं ये कहानी उस समय की है, जब श्रीराम अयोध्या के राजा बनने वाले थे। उसी दौरान रावण ने भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए यहां शिवलिंग की स्‍थापना की। ये कोई आम शिवलिंग नहीं है। इसका आकार अब भी हर साल एक से दो इंच तक बढ़ जाता है।


प्राचीन बावड़ी, जहां से रावण भरता था पानी
रावण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर शिव शंकर भगवान प्रकट हुए और रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने अमरता का वरदान मांगा तो भगवान शिव ने उसे अमर होने की तरकीब बताई। ये तरकीब आसान नहीं थी। भगवान शिव ने कहा था कि रावण को एक ही दिन में पांच चमत्कारी सीढ़ियां बनानी होंगी। इसके बाद उसे अमरता और स्वर्ग में जाने का रास्ता मिल जाएगा।

पौड़ीवाला में बनाई थी दूसरी पौड़ी
रावण ने अमरता पाने के लिए अपना काम शुरू कर दिया। रावण ने पहली पौड़ी हरिद्वार में हर की पौड़ी, दूसरी पौड़ी (सीढ़ी) यहां पौड़ीवाला में, तीसरी पौड़ी चूड़ेश्वर महादेव और चौथी पौड़ी किन्नर कैलाश में बनाई। मगर इसके बाद रावण इतना थक गया कि उसे नींद आ गई। जब वह जागा तो अगली सुबह हो गई थी। ऐसे में उसे अमरता नहीं मिल पाई।

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