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फर्जी M Form मामलाः अब तक सात Arrest, सरकारी विभागों की मिलीभगत की भी हो रही जांच

फर्जी M Form मामलाः अब तक सात Arrest, सरकारी विभागों की मिलीभगत की भी हो रही जांच

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पांवटा साहिब। फर्जी एम फार्म और नकली जीएसटी नंबर और नकली बिल बुक के आधार पर प्रदेश सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाने के मामले में पुलिस ने बड़ी मात्रा में जाली एम फार्म बुक और बिल बुक पकड़ी हैं। साथ ही गिरोह के सरगना सहित सात आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। यह गिरोह हिमाचल से खनिज के ट्रक भरवा कर उन्हें जाली जीएसटी नंबर, जाली एम फॉर्म और जाली बिल लगाकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में पहुंचाता था। जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह पिछले करीब 1 साल से इस क्षेत्र में कार्यरत था।
बहरहाल पुलिस इस मामले में खनन व्यवसायियों सहित सरकारी विभागों की मिलीभगत को लेकर भी जांच कर रही है। डीएसपी पावटा साहिब प्रमोद चौहान ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले रोहित गोयल नाम के जालसाज को पकड़ा। रोहित से पूछताछ के बाद यमुना एसोसिएट और नेगी एसोसिएट नाम की 2 फर्ज़ी कंपनियां बनाने वाले आशीष चौधरी को पकड़ा गया। आशीष चौधरी ने अयूब खान नामक व्यक्ति से इन जाली कंपनियों के कागजात प्रिंट करवाए थे। मामले में यह भी पता चला है कि अयूब खान ने देहरादून के गुरिंदर पाल व उसके चचेरे भाई भूपेंद्र सिंह से एम फॉर्म और जाली बिल बुक बनवाई। इन जाली दस्तावेजों को देहरादून में ही दिनेश कुमार नामक व्यक्ति के प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंट किया गया। पुलिस ने जालसाजी की सारी चेन को दबोच लिया है। साथ ही दस्तावेजों कंप्यूटर प्रिंटर और नकली स्टाम्प सहित कई दस्तावेजों को बरामद कर लिया है। पांवटा डीएसपी ने बताया कि मामले में कुछ और लोगों की संलिप्तता भी सामने आ रही है। सच्चाई का पता लगाकर जल्द ही अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

ऐसे हुआ था खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब सविता माइन एंड मिनरल कंपनी के संचालक दीपेंद्र भंडारी ने पिछले वर्ष उनके जाली एम फार्म पर खनिज चोरी करने का मामला पुलिस के संज्ञान में लाया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की। जांच में अंतर राज्य गिरोह का पर्दाफाश हुआ। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के हाथ यमुना एसोसिएट और नेगी एसोसिएट नाम की 2 फर्जी कंपनियों के नकली एम फार्म, नकली स्टांप, नकली बिल बुक व 5 नकली जीएसटी नंबर पकड़े। इन सरकारी कागजात के आधार पर शातिरों ने साल भर में हजारों ट्रक खनिज हिमाचल से उत्तराखंड उत्तर प्रदेश में पार लगाए।

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