Covid-19 Update

3,07, 628
मामले (हिमाचल)
300, 492
मरीज ठीक हुए
4164
मौत
44,253,464
मामले (भारत)
594,993,209
मामले (दुनिया)

मुश्किल में सियासी परिवार, एक के बाद एक पर वार, सिलसिलेवार पढ़े पूरे का पूरा हाल

देश की तस्वीर बता रही है कि सियासी परिवार पर संकट ही संकट

मुश्किल में सियासी परिवार, एक के बाद एक पर वार, सिलसिलेवार पढ़े पूरे का पूरा हाल

- Advertisement -

देश की राजनीति (Politics) के हाल किसी से छिपे नहीं हैं। महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले आठ से नौ दिन में जो कुछ चल रहा है, उससे हिमाचल में भी चिंता की लकीरे दिखने लगी है। चूंकि, महाराष्ट्र की राजनीति में सब कुछ अस्त व्यस्त नजर आ रहा है। सियासी घटनाक्रमों को देखें तो सबसे ज्यादा खतरा ठाकरे परिवार की सियासत पर पड़ता नजर आ रहा है। असम के गुवाहाटी पहुंचे बागी विधायक अपने आप को असली शिवसैनिक बता रहे हैं। हालांकि, केवल महाराष्ट्र ही नहीं उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और दिल्ली (Delhi) तक देश के कई बड़े सियासी परिवार संकट में फंसे नजर आ रहे हैं।

यह भी पढ़ें- विक्रमादित्य को हॉर्स ट्रेडिंग का डर- चुनाव से पहले हिमाचल में महाराष्ट्र जैसी आशंका

इसी सबके बीच हिमाचल कांग्रेस (Himachal Congress) की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह का चिंतित होना लाजिमी है। उन्हें महाराष्ट्र की तर्ज पर हिमाचल में भी हार्स ट्रेडिंग की आशंका है। खाली यही नहीं, देशभर के दूसरे राजनीतिक परिवार भी स्वयं को किसी संकट से कम नहीं मान रहे हैं।

बात करते हैं गांधी परिवार की। वर्ष 2014 से लेकर अब तक कांग्रेस (Congress) और गांधी परिवार ने कई सियासी झटकों का सामना किया है। हालांकि, पार्टी को वर्ष 2018 में तीन राज्यों में जीत मिल गई थी, लेकिन हाल ही में उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा के दम भरने के बावजूद पार्टी एक सीट पर सिमट गई। वहीं, पंजाब में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के हाथों बुरी तरह हार के बाद सत्ता गंवा दी। हालात इस कदर बिगड़े की पार्टी ने यूपी उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। दिल्ली विधानसभा उपचुनाव राजेंद्र नगर और पंजाब के संगरूर में पार्टी की जमानत जब्त हो गई। ये ऐसे दो राज्य है, जहां कांग्रेस ने शासन किया है।

यूपी के दिग्गज नेता और पिता मुलायम सिंह यादव से कमान हासिल करने के बाद अब तक समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) सुप्रीमो अखिलेश यादव बड़ी सफलता की खोज में हैं। वर्ष 2014, 2017, 2019 और 2022 में पार्टी लगातार पराजय हुई है। यूपी उपचुनाव में पार्टी ने आजमगढ़ और रामपुर जैसी सीटें गंवा दी। कहा गया कि अखिलेश यहां एक बार भी प्रचार के लिए नहीं पहुंचे।

कभी एनडीए के साथ मिलकर पंजाब पर राज करने वाली बादल परिवार के नेतृत्व में शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) अब संकट से जूझ रहा है। परिवार और पार्टी के मुखिया प्रकाश सिंह बादल ने यहां एक दशक तक सीएम के तौर पर शासन किया। अब हाल ऐसे हैं कि संगरूर उपचुनाव में पार्टी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई।

वहीं, विधानसभा चुनाव में विक्रम सिंह मजीठिया समेत कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र में शिवसेना (Shiv Sena) पहली बार बगावत का सामना नहीं कर रही है, लेकिन इस बार हाल ज्यादा बिगड़ते नजर आ रहे हैं। खबर है इस फूट के बाद केवल पुत्र आदित्य ठाकरे ही हैं, जो मंत्री व विधायक के तौर पर अपने पिता सीएम उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि असम के गुवाहाटी में पार्टी के 40 विधायक बगावत कर चुके हैं। फिलहाल विधानसभा में शिवसेना विधायकों की संख्या 55 है। ऐसे में देश की तस्वीर बता रही है कि सियासी परिवार पर संकट ही संकट है।

हिमाचल और देश-दुनिया के ताजा अपडेट के लिए like करे हिमाचल अभी अभी का facebook page

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App


विशेष \ लाइफ मंत्रा


Himachal Abhi Abhi E-Paper



---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है