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समंदर में तिरंगाः Port स्टेटनी पहुंची प्रतिभा सहित सभी छह बेटियां, खुशी की लहर

समंदर में तिरंगाः Port स्टेटनी पहुंची प्रतिभा सहित सभी छह बेटियां, खुशी की लहर

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धनेश गौतम/ कुल्लू। भारतीय नौ सेना की बहादुर जवान बेटियों ने अपनी सबसे लंबी दुनिया की यात्रा के दौरान सभी खतरनाक पड़ाव पार कर लिए हैं। समुद्र की लहरों के बीच दुनिया की सबसे लंबी यात्रा पर निकली इन छह बेटियों ने अपने साहस का परिचय देते हुए दिन रात यात्रा करते हुए हर पड़ाव को हंसते खेलते पार किया है। मंगलवार को कुल्लू की बेटी प्रतिभा जम्वाल सहित यह बेटियां अटलांटिक सागर को पार करते हुए पोर्ट स्टेनली पहुंच गई हैं। इसके आगे का सफर अब बेहद आसान माना जा रहा है।


  • सभी खतरनाक पड़ाव पार करने के बाद अब ली राहत की सांस 
  • समुद्र की लहरों को चीरते हुए आनंद महसूस कर रही है नौ सेना की बहादुर बेटियां 

पोर्ट स्टेनली पहुंचने पर जहां नौ सेना में खुशी का माहौल है। वहीं, छह बेटियों के परिवार वालों को अब बेसब्री से अपनी बेटियों की घर वापसी की आस जगी है। क्योंकि यह यात्रा अब बहुत जल्दी पूरी होने जा रही है। नौ सेना की यह बहादुर जवान बेटियां अपनी छोटी सी वोट आईएनएसवी तारणी के माध्यम से दुनिया की सबसे लंबी यात्रा पर निकली हुई हैं और इस यात्रा के दौरान अब कैप हॉर्न के बाद पोर्ट स्टेनली पहुंच गई हैं। पोर्ट स्टेनली पहुंचने के बाद अब इन बहादुर बेटियों में खुशी की लहर है। अब शीघ्र ही इन बेटियों की विश्व की यह सबसे लंबी यात्रा शीघ्र पूरी होने जा रही है। इस यात्रा के दौरान उक्त बेटियों ने कई खतरनाक पड़ाव पार किए। कुल्लू की बेटी प्रतिभा जम्वाल ने पोर्ट स्टेनली पहुंचने के बाद बताया कि अब उनमें खुशी की लहर है। प्रतिभा ने बताया कि उन्होंने कभी भी इस यात्रा में हार नहीं मानी और न ही खतरनाक पड़ावों को पार करते हुए कोई साहस खोया।

प्रतिभा ने बताया कि अटलांटिक व पैसिफिक सागर के संगम स्थल को कैप हॉर्न के नाम से जाना जाता है। कैप हॉर्न को फतह करना उनके लिए सबसे मुश्किल घड़ी थी। क्योंकि कैप हॉर्न के इतिहास पर नजर डाली जाए तो यहां पर अभी तक कई जहाज डूब चुके हैं और 10 हजार से अधिक लोग यहां अपनी जाने गवां चुके हैं। यह सागर बेहद खतरनाक है और यहां पर तेज हवाओं के कारण इस द्वीप में सबसे भीषण समुद्री तूफान आते हैं। तूफान के लिए यह सागर बेहद संवेदनशील माना जाता है। प्रतिभा ने बताया कि उन्हें इस सागर को पार करते हुए हालांकि कुछ शंका थी। लेकिन, सभी बेटियों के साहस, हौसले से इस सागर को पार करने में कामयाबी हासिल की है। प्रतिभा ने बताया कि पोर्ट स्टेनली पहुंचने के बाद अब वे अपने आप को सुरक्षित मान रही हैं और अब यह यात्रा आसानी से पूरी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इन खतरनाक पड़ावों को पार करते हुए हमने कई अनुभव समुद्र की लहरों में महसूस किए हैं।

सभी लड़कियों ने इन खतरनाक पड़ावों को पार करते हुए धैर्य व सयंम रखा और अटलांटिक व पैसिफिक सागर के संगम के अच्छे अनुभव को पार किया है। 10 सितंबर को गोवा से रवाना हुई पृथ्वी की इस सबसे लंबी यात्रा में आईएनएसवी तारनी पर कुल्लू की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जम्वाल सहित लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी, लेफ्टिनेंट गुप्ता, लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाती, लेफ्टिनेंट विजया, लेफ्टिनेंट अश्वनी शामिल हैं। उधर, देशभर के लोगों ने इन बेटियों को खतरनाक पड़ाव  सकुशल पार करने पर हार्दिक बधाई दी है। वहीं, देशभर के लोग पूरी टीम की बेसबरी से वापस आने की प्रतिक्षा कर रहे हैं। 

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