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नवरात्र के अनुष्ठान के लिए सावधानियां भी है जरूरी

Precautions for Navratri rituals

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नवरात्र के दौरान हर व्यक्ति किसी न किसी इच्छापूर्ति के लिए मां की आराधना करता है। अपने कार्य को सफल बनाने व नौ देवियों को प्रसन्न करने के लिए सब कई तरह के अनुष्ठान करते हैं। लेकिन अनुष्ठान करने के लिए कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं यह इसलिए अपेक्षित हैं क्योंकि इनका ध्यान रखने से ही आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकती है। हम ऐसी ही सावधानियों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं …

  • अनुष्ठान के आरंभ में हाथ में जल, फूल व अक्षत लेकर संकल्प करें कि आप किस कार्य के लिए यह प्रयोग कर रहे हैं।
  • साधना स्थल एकांत में बना हुआ होना चाहिए। इसमें प्रवेश करने से पूर्व स्नान करें तथा स्वच्छ व पहन कर ही पूजा में बैठें।
  • महिलाएं सिर के बाल धोकर बिना कंघी किए पूजा में बैठें।
  • पूजन के समय धूप, दीपक एवं अगरबत्ती पुष्प नैवेद्य आदि का प्रयोग करें। जहां पूजन करें, वहां पूर्ण स्वच्छता होनी चाहिए।
  • चौकी पहले ही धो-पोंछ कर पूजा के स्थान में रखें। समय से पहले सारी पूजन सामग्री वहां रख लेनी चाहिए।

  • आसन के लिए कुश का आसन उत्तम है पर अगर नहीं उपलब्ध होता तो कंबल का आसन लें।
  • संकल्प करने के बाद जप आरंभ करने के बाद समाप्ति से पहले नहीं उठें।
  • साधक लाल, पीला या सफेद वस्त्र पहनें। महिलाएं पीली या लाल साड़ी पहन सकती हैं।
  • साधना, हमेशा घर के एकांत कक्ष में, देवी मंदिर में, पर्वत शिखर पर अथवा मंदिर में करनी चाहिए।
  • प्रतिदिन जप की संख्या एक समान ही होनी चाहिए अनियमित संख्या में जप करने का कोई फल नहीं मिलता।
  • दशमी के दिन हवन की भस्म, चढ़े हुए फूल आदि जल में विसर्जित कर दें।

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