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गर्भवती महिलाएं दूर रहें पैसिव स्मोकिंग से, जाने क्या है खतरा

गर्भवती महिलाएं दूर रहें पैसिव स्मोकिंग से, जाने क्या है खतरा

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हमारे घरों में पैसिव स्मोकिंग सामान्य सी बात है। यानी कि धूम्रपान तो कोई और करता है पर उसका घातक प्रभाव घर के अन्य लोगों पर पड़ता है। जो सबसे चिंता जनक बात है वह यह कि इसका गर्भस्थ शिशु पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है । अजन्मे शिशु पर इसका प्रभाव इतना घातक होता है कि या तो वह गर्भ में ही मर जाता है अथवा जन्म लेने के बाद उसकी मृत्यु हो जाती है।

जन्मदोष से प्रभावित जो भी शिशु होते हैं जन्म लेने के बाद उनका स्वस्थ शिशु के तौर पर जीवित रहना भी संदिग्ध होता है। वे कम वजन के होते हैं और उन्हें सांस की तकलीफ भी संभव हो सकती है। एक हालिया रिसर्च में पाया गया कि पाकिस्तान में प्रतिवर्ष 40 प्रतिशत महिलाओं ने लगभग 17,000 ऐसे शिशुओं को जन्म दिया जो जन्म दोष से प्रभावित थे। यह अध्ययन 30 विकासशील देशों पर किया गया था और इनके आंकड़े भी 2008 से 2013 तक के लिए गए थे। परिणाम चौंकाने वाले थे।


आर्मीनिया,इंडोनेशिया,जोर्डन और बांग्लादेश और नेपाल की 50 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे पैसिव स्मोक का शिकार हुई थीं। सिर्फ इंडोनेशिया में ही प्रति वर्ष की दर से 10,000 ऐसे मामले मिले । पाकिस्तान में 1 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिनकी माताएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती थीं जबकि 7 प्रतिशत पैसिव स्मोकिंग की वजह से प्रभावित थीं। कुल 30 देशों में 5 देश ऐसे थे जिनमें पैसिव स्मोकिंग के मामले कहीं ज्यादा थे। जरूरी है कि अजन्मे शिशुओं को पैसिव स्मोकिंग से सुरक्षा मिले ताकि वे एक स्वस्थ शिशु के रूप में जन्म ले सकें।

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