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धूमल ने कोसी प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली

धूमल ने कोसी प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली

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दो नेता, एक पार्टी, विचार अलग-अलग। आज बीजेपी के दो बडे़ नेताओं के बयान आए, हैरान करने ने वाली बात यह है कि एक प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली को कोस रहा है तो दूसरा सराहना कर रहा है। दोनों ही नेता प्रदेश के सीएम रह चुके हैं। इनमें प्रेम कुमार धूमल व शांता कुमार शामिल हैं…

हमीरपुर। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रदेश की कांग्रेस सरकार ऐसे हादसों को रोकने के बारे में बिल्कुल भी गंभीरता नहीं दिखा रही। यह शब्द नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहे। धूमल ने मंडी हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवदेना व्यक्त की है। धूमल ने इस हादसे के लिए प्रदेश सरकार की लचर कार्यप्रणाली को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि लगातार दिल दहला देने वाले हादसे हो रहे हैं लेकिन प्रदेश की कांग्रेस सरकार इनको रोकने के प्रयास करने की बजाएए सिर्फ कोरी घोषणाएं करने में जुटी हुई है।

  • bjpकहा, सड़क दुर्घटनाओं पर गंभीर नहीं प्रदेश सरकार
  • नेता विपक्ष धूमल ने सरकारी कार्यप्रणाली पर जताया असंतोष
  • कई भयानक हादसों के बाद भी नहीं जागी सरकार
  • मंडी हादसे पर जताया गहरा शोक

मल का कहना है कि प्रदेश की सड़कों पर अब मुसाफिरों की जिंदगी सुरक्षित नहीं रह गई है। कुछ समय पहले भी एक के बाद एक हुए भीषण हादसों ने लोगों को हिलाकर रख दिया था। तब भी सरकार ने घोषणा की थी कि प्रदेश की सडकों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित करेंगे और उन ब्लैक स्पॉट्स पर सुरक्षा की दृष्टि से इंतजाम करने और रेलिंग व क्रैश बैरियर लगाने की बात कही थी। परंतु, आज फिर से मंडी में हुई सड़क दुर्घटना ने सरकार के सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल कर रख दी है। कोई सुरक्षा इंतजाम की व रेलिंग लगाने वाली बात पूरी नहीं की गई। प्रदेश सरकार के सड़क दुर्घटनाओं के प्रति इस असंवेदनशील रवैये पर पूर्व सीएम ने कड़ा ऐतराज जताया है।
accdident2धूमल ने कहा कि अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में समिति के चेयरमैन सेवानिवृत न्यायाधीश ने भी, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रदेश सरकार के विभागीय उच्चाधिकारियों द्वारा बैठक में, स्टाफ स्ट्रेंथ और रोड सेफ्टी सेल एवं इसके लिए अलग से स्थापित होने वाले सचिवालय के ब्लू प्रिंट संबंधित तथ्य उपलब्ध न करवाए जाने पर, प्रदेश की खिंचाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश भी दिए हैं की प्रदेश सरकार अपने तौर पर संसाधन जुटाए, ताकि जिला एवं उपमंडल स्तर पर भी सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए। बावजूद इसके पिछले दो सालों से अभी तक रोड सेफ्टी सेल का गठन नहीं किया जा सका है और न हि इसके लिए अलग से सचिवालय स्थापित किया गया।

नेता विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन सब सड़क हादसों के लिए नैतिक जिम्मेवारी किसकी है। एक दौर वो था जब ऐसा कोई सड़क या रेल हादसा होता था तो संबंधित विभाग का मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेवारी समझते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देता था। परंतु, आज के वक़्त में इस्तीफा तो दूर संबंधित विभाग के मंत्री दुर्घटना स्थाल पर कई बार जाना भी गवारा नहीं समझते।

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