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मंडी जिला में विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत दिया 85 से 90 लाख का मुआवजा

मंडी जिला में विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत दिया 85 से 90 लाख का मुआवजा

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सुंदरनगर। हाईकोर्ट के जस्टिस और प्रदेश लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन धर्मचंद चौधरी ने कहा कि मंडी में अथॉरिटी द्वारा हिंसक अपराध के विक्टिम कंपनसेशन स्कीम (Victim Compensation Scheme) के अंतर्गत अभी तक 85 से 90 लाख तक का मुआवजा प्रभावितों को दिया जा चुका है। इसमें जिला मंडी के कोटली क्षेत्र की दो लड़कियों पर एसिड अटैक से प्रभावित हो गई थीं, इसमें अथॉरिटी द्वारा विक्टिम कंपनसेशन स्कीम (Victim Compensation Scheme) के अंतर्गत 25 लाख मुआवजा दिया गया है। उन्होंने कहा कि हादसे में प्रभावितों के चेहरे जल गए हैं। उन्होंने कहा कि बेशक युवतियों द्वारा खोई गई चीज को तो कोई वापस नहीं ला सकता, लेकिन विक्टिम कंपनसेशन स्कीम (Victim Compensation Scheme) से आर्थिक सहायता कर इनके दुख दर्द थोड़े कम किए जा सकते हैं। धर्मचंद चौधरी ने कहा कि कंपनसेशन स्कीम के तहत हत्या आदि होने की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहायता देने से उनको सहायता प्रदान की जा रही हैं।

प्रदेश में लीगल सर्विस अथॉरिटी के चल रहे कार्यों पर विशेष वार्ता के दौरान हिमाचल हाईकोर्ट के जस्टिस और प्रदेश लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन धर्मचंद चौधरी ने कहा कि अभी यह कहना तो मुश्किल होगा, लीगल सर्विस अथॉरिटी अपना लक्ष्य पूरा कर पाई हो, लेकिन अथॉरिटी उपमंडल से लेकर प्रदेश स्तर तक लोगों को कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इसमें अभी बहुत सारा काम करना बाकी है और इसकी स्कीमों की अभी लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है। इसके बावजूद भी लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कैंप और प्रोग्राम गांवों से लेकर दूरदराज के क्षेत्रों में लगाए जाते हैं। इसमें जज, पैनल के रिटेनर लॉयर और लीगल वालंटियर लोगों को जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा कि अभी इसमें लोगों को और अधिक जागरूक करने की जरूरत है। जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(ए) के अंतर्गत न्याय सबको मिलना चाहिए और कोई धर्म, जाति व वर्ग इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में दिए गए समानता के अधिकार में किसी भी व्यक्ति के अधिकारों के हनन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के अभाव के कारण अभी लोगों को न्यायालय व इसके तरीके के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानूनी अनिभिज्ञता को लेकर देश की संसद द्वारा लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट,1987 पारित किया गया था।

उन्होंने कहा कि नालसा (नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी) द्वारा ट्राइबल एरिया के लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में जस्टिस धर्मचंद चौधरी द्वारा स्वयं विश्व के सबसे ऊंचे गांव कौरिक, लाहुल-स्पीति के गोंदला और चंबा के सलूणी में लीगल अवेयरनेस कैंप आयोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन कैंपों का मकसद लोगों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत करवाना है।

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