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माफिया कहने पर भड़के निजी Bus Operator, धर्मशाला में बैठक कर जताया ऐतराज

माफिया कहने पर भड़के निजी Bus Operator, धर्मशाला में बैठक कर जताया ऐतराज

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धर्मशाला। हिमाचल पथ परिवहन मजदूर संघ एवं संयुक्त समन्वय समिति के नेताओं के निजी बस ऑपरेटरों को माफिया कहने पर निजी बस ऑपरेटर यूनियन कांगड़ा भड़क गई है। निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने प्रधान हैप्पी अवस्थी की अध्यक्षता में धर्मशाला में बैठक कर इस पर एतराज जताया। निजी बस ऑपरेटर यूनियन का कहना है कि वह अपनी बसों का संचालन नियमों और कानून के अनुसार करते हैं तथा अपने व्यवसाय से हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाते हैं। इसके साथ ही समय पर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्सों को सरकार के खजाने में जमा करवाते हैं, ताकि प्रदेश का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि माफिया तो वह लोग हैं जो सवारियों से किराया वसूल लेते हैं, लेकिन सरकार को टैक्स नहीं देते। एचआरटीसी द्वारा जो किराया वसूला जाता है, उसमें टैक्स भी सम्मिलित होता है।
इस टैक्स को सरकारी खजाने में जमा करवाना पड़ता है। लेकिन, एचआरटीसी ने पिछले कई वर्षों से अपना टैक्स जमा नहीं करवाया है। माफिया तो उन लोगों को कहा जाता है जो फर्जी डिमांड बनाकर केंद्र सरकार से लगभग 791 बसें ले लेते हैं और द्वेश भावना से निजी बस ऑपरेटरों से आगे पीछे गैर कानूनी ढंग से चला देते हैं। इन बसों को केंद्र सरकार से लेने के लिए झूठी डीपीआर तैयार की गई तथा जो जेएनएनयूआरएम की बसों को निर्धारित 13 कलस्टरों से बाहर अपनी मर्जी से चलाते हैं तथा उच्च न्यायालय शिमला के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जेएनएनयूआरएम व एचआरटीसी द्वारा बसों को बिना रूट परमिट व बिना समय सारिणी के सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। इस कार्य प्रणाली को माफिया कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि एचआरटीसी द्वारा अनुबंध पर रखे गए चालक और परिचालकों से 12 से 15 घंटे ड्यूटी लेने के बाद भी कई वर्षों तक मात्र 6700 रुपये मासिक वेतन अदा कर उनका शोषण किया जा रहा है। यहां तक कि प्रशिक्षण के नाम पर 9000 कंडक्टरों की भर्ती कर ली और उनको 120 रुपये दैनिक भत्ते के हिसाब से पैसे दिए गए। कई महीनों तक सेवाएं लेने के बाद उन बेरोजगार नौजवानों को फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। निजी बस ऑपरेटर पर लगाए गए आरोप कि गलत ढंग से रूट परमिट व समय सारिणी को लेकर एचआरटीसी से अंधी प्रतिस्पर्धा करते हैं को लेकर भी बैठक में कड़े शब्दों में एतराज जताया गया। उनका कहना है कि पिछले कई सालों से निजी बस ऑपरेटरों को कोई भी नया रूट परमिट जारी नहीं किया गया है। जबकि, एचआरटीसी के पास पिछले पांच सालों में लगभग 1800 रूट परमिट थे,  जोकि बढ़कर अब 3200 के करीब हो गए हैं। बैठक में परिवहन निगम के कथित नेताओं को आगाह किया गया है कि भविष्य में ऐसे निराधार आरोप लगाने से बाज आएं अन्यथा निजी बस ऑपरेटर इनके  कानूनी कार्रवाई अमल में लाएंगे।


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