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पहल: प्रदेश में औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने जारी किए 1 Cr.

पहल: प्रदेश में औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने जारी किए 1 Cr.

Medicinal Farming: शिमला। हिमाचल में औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में हर दिन पहल हो रही है। राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार भी इस दिशा में जुटी गई है। राज्य में कई औषधीय पौधों की खेती होती है। औषधीय खेती को बढ़ाने के लिए नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने राज्य को एक करोड़ रुपए की वित्तीय मदद जारी की है। इस राशि से प्रदेश में अधिकत्तर इलाकों में पैदा होने वाले औषधीय पदार्थों की खेती को प्रोत्साहित करने को यह राशि जारी की है। वहीं इस मदद को हासिल करने के लिए किसानों को क्लस्टर बनाने होंगे और कम से कम दो हेक्टेयर भूमि का एक समूह बनाना होगा।

किसानों के हित के लिए केंद्र ने उठाया कदम

केंद्र द्वारा जारी की गई एक करोड़ रुपए की राशि किसानों के लिए जारी की गई है। राज्य के आयुर्वेद विभाग को यह राशि जारी हुई है। इसके तहत कुल 120 हेक्टयर भूमि पर अतीश, कुटकी, कूठ, सुगन्धवाला, सफेद मुसली, अश्वगंधा, सर्पगंधा व तुलसी की क्रमशः 26 हेक्टेयर, 26 हेक्टेयर,16 हेक्टेयर, 20 हेक्टेयर, 5 हेक्टेयर,13 हेक्टेयर, 7 हेक्टेयर और 7 हेक्टेयर पर की जाएगी।

औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने को नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड ने पहले हिमाचल को 36.82 लाख रुपए के औषधीय पौधों की खेती के प्रोजेक्ट मंजूर किए थे। लेकिन बाद में स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड व हिमाचल प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्र ने अतिरिक्त 63.24 लाख के प्रोजेक्ट प्रस्ताव को मंजूरी देकर अब करीब एक करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं।

राज्य में आयुर्वेद फार्मा को प्रदेश में ही मिलेगा कच्चा माल

केंद्र की इस मदद से इन औषधीय पौधों की खेती को बढ़ाया जाएगा और इससे राज्य में आयुर्वेद फार्मा को भी यहीं पर कच्चा माल मिलने लगेगा। इसके साथ-साथ किसानों की आर्थिकी को बढ़ाने को एक और माध्यम मिलेगा। राज्य में औषधीय खेती की भारी संभावनाएं हैं और इसे देखते हुए सरकार भी इसे बढ़ाने में जुटी है।

स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के नोडल ऑफिसर डॉ. दिनेश कुमार ने बताया की इच्छुक किसान संबंधित जिला आयुर्वेद अधिकारी, आयुर्वेद अनुसन्धान केंद्र जोगिन्दर नगर के अतिरिक्त स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड आयुर्वेद निदेशालय से संपर्क कर सकते हैं। उनका कहना था कि किसानों को एक समूह बनाना होगा और इसमें कम से कम दो हेक्टेयर की भूमि होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि क्लस्टर बनाकर अधिक से अधिक किसान इससे जुड़ सकते हैं और इससे औषधीय खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

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