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पुरी के ‘आफताब’ की SC से अपील: टोटल shut down करके जगन्नाथ रथयात्रा निकालने की अनुमति दें

पुरी के ‘आफताब’ की SC से अपील: टोटल shut down करके जगन्नाथ रथयात्रा निकालने की अनुमति दें

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पुरी। देश में जारी कोरोना संकट के बीच महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस साल नहीं होगी। इस साल पुरी रथयात्रा को स्थगित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने निर्देश दिया है। जिसके बाद अब पुरी के रहने वाले एक मुस्लिम समाजसेवी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) को केवल पुरी में निकालने की इजाजत दी जाए। मुस्लिम समाजसेवी आफताब हुसैन ने अपने वकील प्रणय कुमार महापात्र के जरिए यह याचिका दाखिल की है।

सोशल मीडिया पर हीरो बन गए हैं पुरी के ‘आफताब हुसैन’

इसमें कहा गया है कि रथयात्रा निकालने पर न्यायालय को फिर से सोचना चाहिए। पुरी शहर को टोटल शटडाउन (Total shutdown) करके मंदिर के पुजारी और सेवकों द्वारा ही रथयात्रा निकाली जा सकती है। श्रीजगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा टूटने से बचाई जा सकती है। बताया जा रहा है कि इस याचिका पर रविवार या सोमवार को कोर्ट द्वारा सुनवाई की जा सकती है। पुरी शहर में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा ना रुके, इसके लिए एक मुस्लिम की तरफ से याचिका दायर किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी आफताब की खूब तारीफ हो रही है। इस याचिका के बारे में जानकारी देते हुए आफताब के वकील ने बताया कि याचिका श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपरा और पूरे उड़ीसा के लोगों की आस्था को देखते हुए लगाई गई है।


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वकील ने बताया किस तरह बिना बाहरी लोगों के हो सकती है रथ यात्रा

वकील प्रणय कुमार महापात्र ने बताया कि हमने याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 23 जून को पूरी शहर को पूरी तरह शटडाउन किया जाए। किसी को भी घर से निकलने की अनुमति ना हो। मंदिर में 1172 सेवक हैं। इन सभी का कोविड-19 टेस्ट (Covid-19 Test) किया जा चुका है जो नेगेटिव आया है। तीनों रथ खींचने के लिए 750 लोगों की आवश्यकता होती है। मंदिर के पास 1172 सेवक हैं। ये ही लोग ही रथयात्रा के रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले जा सकते हैं। इस तरह रथयात्रा बिना बाहरी लोगों के शामिल हुए भी निकाली जा सकती है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता में बैठी तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस रथयात्रा पर रोक लगाते हुए कहा था कि यदि सुप्रीमकोर्ट रथयात्रा करने की अनुमति देती है तो फिर भगवान जगन्नाथ हमें क्षमा नहीं करेंगे। केवल पुरी नहीं, बल्कि इस साल पूरे ओडिशा में किसी भी जगह पर रथयात्रा नहीं होगी।

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