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एसजेवीएन में बिजली बोर्ड के 30 फीसदी स्टाफ की शर्त लागू

एसजेवीएन में बिजली बोर्ड के 30 फीसदी स्टाफ की शर्त लागू

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शिमला। सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) में बिजली बोर्ड के 30 प्रतिशत स्टाफ रखने की शर्त लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने इसे अनिवार्य बताते हुए शर्तें लागू कर दी है। ऐसे में बिजली बोर्ड के 30 फीसदी अफसरों के कोटे को एसजेवीएन में लागू करना होगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के तहत बिजली बोर्ड में भर्ती की जाएगी और सेवाएं एसजेवीएन में देनी होगी। बताया गया कि इस मसले पर हाल ही में प्रदेश सरकार और एसजेवीएन के बीच एग्रीमेंट भी हुआ है। जिसके आधार पर नियुक्तियां की जाएगी।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 30 प्रतिशत की शर्त असिस्टेंट इंजीनियर स्तर के लिए लागू की गई है। हालांकि अभी बिजली बोर्ड के पास सर्पलस अफसर नहीं हैं, लेकिन आने वाले दिनों में लोक सेवा आयोग के तहत ये नियुक्तियां की जानी है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में एसजेवीएन में बिजली बोर्ड के 450 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। एनटीपीसी में भी बिजली बोर्ड के 30 प्रतिशत स्टाफ की नियुक्ति की शर्त रखी थी, लेकिन वन टाइम एग्रीमेंट हुआ है। बताया गया कि एनटीपीसी ने इंजीनियर स्तर के 35 अफसरों की नियुक्ति के लिए राज्य बिजली बोर्ड को ऑफर किया था, जिसमें से 11 अफसरों की नियुक्ति हुई और 6 प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। शेष 18 पदों को अब नहीं भरा जाएगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक एनटीपीसी के साथ यह सिर्फ वन टाइम एग्रीमेंट था।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की पुष्टि

अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण कपूर ने कहा कि एसजेवीएन में 30 प्रतिशत इंजीनियर स्तर के अफसरों की नियुक्तियां बिजली बोर्ड से की जाएंगी, इसके लिए शर्तें लागू कर दी हैं। एनटीपीसी के साथ वन टाइम एग्रीमेंट है। आने वाले दिनों में एनएचपीसी के साथ भी इस मसले पर निर्णय लेंगे।

10 वर्षों से लटकी लूहरी बिजली परियोजना का एग्रीमेंट जल्द

शिमला। पिछले 10 सालों से लटकी 649 मेगावाट की लूहरी बिजली परियोजना के लिए जल्द ही एग्रीमेंट होगा। हालांकि प्रदेश सरकार और एसजेवीएन में बीच 2008 में एमओयू हस्ताक्षर भी हो चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। इसके देखते हुए प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन को इस मसले पर जल्द ही इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस करवाने के निर्देश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पहले इस परियोजना को एक चरण में ही तैयार की जानी थी, लेकिन विस्थापित ग्राम वासियों द्वारा आपत्ति जताने के बाद इसे तीन चरण में स्थापित करने के लिए एमओयू हस्ताक्षर हुए। वर्तमान में बिजली परियोना निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस नहीं मिली है। इसके साथ-साथ एफसीए का मामला भी लंबित है।
ऊर्जा निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार और एसजेवीएन के बीच जल्द ही एग्रीमेंट होगा। उससे पहले एसजेवीएन को केंद्र सरकार से इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस करवानी होगी। बताया गया कि लूहरी बिजली परियोजना निर्माण के लिए इक्वीटी बढ़ाने पर भी बात चली है, जिसका प्रस्ताव आगामी कैबिनेट मीटिंग में जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि जल्द ही एसजेवीएन के साथ एग्रीमेंट करेंगे। केंद्र सरकार के पास लंबित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए एसजेवीएन को निर्देश भी दिए हैं।

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