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वसुंधरा राजे पर राहुल का हमला, बोले – यह 2017 है, 1817 नहीं

वसुंधरा राजे पर राहुल का हमला, बोले – यह 2017 है, 1817 नहीं

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Rahul Gandhi: नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे पर हमला बोला है। राजस्थान सरकार के अध्यादेश को लेकर राहुल गांधी ने वसुंधरा राजे पर निशाना साधा है। अपने ट्वीट में राहुल ने कहा कि, ‘मैडम चीफ मिनिस्टर, हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। यह साल 2017 है, 1817 नहीं। गौर रहे कि हाल ही में वसुंधरा सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश में कहा गया है कि, किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक के खिलाफ सरकार से मंजूरी लिए बिना किसी तरह की जांच नहीं की जाएगी। अध्यादेश के अनुसार कोई भी लोकसेवक अपनी ड्यूटी के दौरान लिए गए निर्णय पर जांच के दायरे में नहीं आ सकता है, सिवाय कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर 197 के, जिसमें सरकार के स्तर पर सक्षम अधिकारी को 180 दिन अंदर प्रोसिक्यूशन की इजाजत देनी होगी। अगर 180 दिन के अंदर प्रोसिक्यूशन की इजाजत नहीं दी जाती है तो स्वयं ही इजाजत मान ली जाएगी।

Rahul Gandhi: यह है वसुंधरा सरकार का अध्यादेश:

  1. किसी भी लोकसेवक, सरकारी कर्मचारी, जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ कोई कार्रवाई राज्य सरकार की इजाजत के बिना नहीं होगी।
  2. किसी भी लोकसेवक के खिलाफ कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करवा सकता है और न ही पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है।
  3. किसी भी लोकसेवक के खिलाफ कोई कोर्ट नहीं जा सकता है और न ही जज किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई आदेश दे सकता है।
  4. किसी भी तरह का भी मीडिया किसी लोकसेवक के खिलाफ बिना सरकार की इजाजत के आरोप नहीं लगा सकता है।
  5. किसी भी लोकसेवक की शिकायत करने से पहले सरकार से इजाजत लेनी होगी।
  6. 180 दिन के अंदर सरकार के स्तर पर सक्षम अधिकारी इजाजत देगा और 180 दिन के अंदर इजाजत नहीं दी गयी तो स्वयं ही इजाजत मान ली जाएगी।
  7.  इस कानून का उल्लंघन करने वाले दंड के हकदार होंगे।
  8. इस अध्यादेश को 23 अक्टूबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में बिल के रूप में पारित किया जाएगा।

वसुंधरा सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का पुरजोर विरोध हो रहा है। ऐसे में सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि आखिर किसे बचाने के लिए इतनी जल्दबाजी में यह अध्यादेश लाया जा रहा है। इस अध्यादेश ने मीडिया के हाथ भी बांध कर रख दिए हैं। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक का नाम और पहचान भी कोई मीडिया तब तक जारी नहीं कर सकता है, जब तक सरकार के सक्षम अधिकारी इसकी इजाजत नहीं दें। इस अध्यादेश को क्रिमिनल लॉ राजस्थान अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस 2017 का नाम देकर मीडिया पर गैग आर्डर लगाया गया है।


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