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फांसी का फंदा भी उसके 2 घंटे तक नहीं निकाल पाया था प्राण, उसके आगे की कहानी पढ़े

फांसी का फंदा भी उसके 2 घंटे तक नहीं निकाल पाया था प्राण, उसके आगे की कहानी पढ़े

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नई दिल्ली। फांसी का फंदा भी उसके 2 घंटे तक नहीं निकाल पाया था प्राण, दिल्ली में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आ चुका है। मामला दिल्ली की तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में वर्ष, 1982 में रंगा-बिल्ला (Ranga-Billa) से जुड़ा है। इसमें एक दोषी फांसी के फंदे पर लटकने के बाद 2 घंटे तक जिंदा रहा था। तिहाड़ जेल में कई वर्ष तक कार्यरत रहे सुनील गुप्ता ने ब्लैक वारंट नामक अपनी किताब में लिखा है कि तिहाड़ में वर्ष 1982 में रंगा और बिल्ला को फांसी के तख्ते पर लटकाया गया था। फंदे पर लटकाने के दो घंटे बाद जब चिकित्सक यह जांच करने गए कि दोनों की मौत हुई या नहीं तो पता चला कि रंगा की पल्स काम कर रही थी।

बाद में रंगा के फंदे को नीचे से खींचा गया और उसकी मौत हुई। फांसी के दौरान गर्दन की हड्डियों में अचानक झटका लगता हैए इससे तुरंत मौत हो जाती है। यह पूरी प्रक्रिया चंद सेकेंड में ही हो जाती है। याद रहे कि इन दिनों निर्भया मामले (Nirbhaya Issue) में चारों दोषियों विनय, पवन, अक्षय और मुकेश की फांसी को लेकर चर्चा गरम है। राष्ट्रपति के पास गई दया याचिका पर निपटारा होना ही बाकी है। इस सब प्रक्रिया के होने के बाद चारों दोषियों को फांसी के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया जाएगा।


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