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हर घर के आंगन में सजे रंगोली

हर घर के आंगन में सजे रंगोली

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रंगोली भारतीय परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारी वैदिक संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक है और इसे चौंसठ कलाओं में गिना जाता है। त्योहारों के आते ही हर आंगन तरह-तरह की रंगोलियों से सज जाते हैं। हमारे देश में पर्व-उत्सव अथवा किसी भी मांगलिक कार्य में रंगोली बनाने की प्रथा है। आखिर ये खूबसूरत रंगोली कैसे हमारे जीवन में शामिल हुई यह जानना भी जरूरी हो जाता है। हम आपको बताते हैं रंगोली से जुड़ी एक खूबसूरत कथा, जो हमारी परंपराओं में इसके महत्व को समझाती है …

कहते हैं कि एक बार भगवान शिव ने हिमालय प्रस्थान करते हुए देवी पार्वती से कहा – जब मैं लौटूं तो तुम्हारा घर आंगन जगमगाता हुआ मिलना चाहिए अन्यथा मैं पुनः हिमालय पर लौट जाऊंगा। शंकर जी तो चले गए पर पार्वती चिंता में पड़ गईं उन्होंने घर साफ किया गोबर से लिपाई की और कुछ फूल भी एकत्र किए। घर सूख भी न पाया था कि शंकर जी के आने की सूचना मिली। पार्वती हड़बड़ा कर दौड़ीं और उनका पांव गीले आंगन में फिसल गया।


शिवजी ने देखा तो मंत्रमुग्ध से चकित रह गए। आंगन में पार्वती के पांवों की कलात्मक छाप थी। पांवों में लगे महावर के लाल रंग का अंकन और उन पर गिरे हुए फूल सब एक मनोरम दृश्य से लग रहे थे। इस रंगीन आकृति पर प्रसन्न होकर शिवजी ने वरदान दिया – आज से जिन घरों में यह रंगोली सजाई जाएगी वहां शिव का वास होगा। घर आंगन धन-धान्य से भरा रहेगा तभी से घरों में रंगोली बनाने की प्रथा चल पड़ी।

दिवाली पर रंगोली के बिना घर की सजावट अधूरी रहती है। यह एक प्राचीन परंपरा है और सदियों से इसका चलन रहा है। रंगोली को देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में बनाया जाता है। दक्षिण भारत की महिलाएं प्रातः उठते ही अपने-अपने द्वार के सामने सुंदर रंगोली बनाती हैं। उत्तर भारत में इसे अल्पना कहा जाता है। रंगोली में कलश पुष्प मछली, पक्षी, हाथी, शंख और तारा आदि का अंकन किया जाता है। इस सबकी रचना के पीछे सुख-समृद्धि एवं ऐश्वर्य की ही कामना परिलक्षित होती है।

रंगोली हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। वैसे भी खाली आंगन को हमारी संस्कृति में अशुभ माना गया है। दीपावली के पावन अवसर पर यदि घर-आंगन में सफाई कर रंग बिरंगी रोशनी के साथ रंगोली भी सजाई जाए तो भला लक्ष्मी हमारे घर क्यों नहीं पधारेंगी। लक्ष्मी को रंगोली प्रिय है इसे देख कर वे प्रसन्न होती हैं और हमें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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