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किन्नौर में 3 घंटे रोके रखा आर्मी अस्पताल से रेफर मरीज, सवालों में घिरे पुलिस प्रमुख

किन्नौर में 3 घंटे रोके रखा आर्मी अस्पताल से रेफर मरीज, सवालों में घिरे पुलिस प्रमुख

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शिमला। आर्मी के झाकड़ी स्थित चिकित्सालय से चंडीगढ़ रेफर पूर्व सैनिक को चौरा पुलिस चेक पोस्ट घंटों रोके रखा। पुलिस ने ई-पास ना होने के चलते गाड़ी को रोका। डीसी द्वारा ई-पास जारी होने के बाद ही जाने दिया। उधर, किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएं हैं। उन्होंने कहा कि आज सुबह चंडीगढ़ के लिए रेफर मरीज को अनावश्यक तरीके से किन्नौर सीमा पर घंटों रोका गया, जबकि गाइडलाइंस में रेफर मरीज को रोकने का कोई सवाल ही पैदा नहीं है।

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वहीं, किन्नौर के पुलिस प्रमुख अपने बच्चों को दिल्ली रेड जॉन से लेकर किन्नौर पहुंचा चुके हैं। बता दें कि 75 वर्षीय पूर्व सैनिक को आर्मी के झाकड़ी स्थित चिकित्सालय से चंडीगढ़ निजी अस्पताल के लिए रेफर किया गया था, लेकिन आज सुबह 5:30 बजे मरीज लेकर जब गाड़ी चौरा बैरियर पहुंची तो वहां तैनात पुलिस अधिकारी ने मरीज को आगे जाने से रोका। मरीज के तीमारदार ने पुलिस को बैरियर पर मरीज के रेफर संबंधी सभी दस्तावेज दिखाए, जिस में सेना चिकित्सालय के चिकित्सक ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चंडीगढ़ रेफर किया था। मरीज के रेफर दस्तावेजों पर सेना के चिकित्सक के अलावा उच्च सेना अधिकारी ने भी मुहर समेत हस्ताक्षर किए थे। तीमारदार ने मौके के पुलिस अधिकारियों को लॉकडाउन व कर्फ्यू के दौरान सरकार द्वारा जारी रेफर मरीज संबंधी गाइडलाइन का हवाला दिया। लेकिन, पुलिस जिला प्रशासन द्वारा जारी ई-पास के बिना आगे छोड़ने को तैयार नहीं हुई।


पूर्व सैनिक के पुत्र विजय नेगी ने बताया कि उनके पिता को झाकड़ी आर्मी

हॉस्पिटल से 18 अप्रैल को चंडीगढ़ निजी अस्पताल के लिए रेफर किया गया था, लेकिन पैसों के बंदोबस्त के लिए वह अपने घर चौरा चले गए। दूसरे दिन रविवार होने के कारण बैंक से पैसे नहीं निकाल पाए। सोमवार को पैसे निकालने के बाद उन्होंने ई-पास के लिए अप्लाई किया, लेकिन किसी कारण पास नहीं पहुंच पाया। आज सुबह 5:30 बजे चौरा बैरियर पहुंचे तो उन्हें वहां पर पुलिस ने आर्मी चिकित्सालय रेफर के सभी दस्तावेज दिखाने के बाद भी रोक दिया और पास की मांग करने लगे। उन्होंने बताया कि पुलिस दो तरह के नियम अपना रही है। एक ओर तो पुलिस अधीक्षक अपने बच्चे दिल्ली रेड जॉन से किन्नौर पहुंचा रहे हैं। दूसरे लोगों की तरह उनके आवास पर होम क्वांरटाइन का बोर्ड भी नहीं लगाया जा रहा है। दूसरी और रेफर मरीज को पुलिस बैरियर से आगे छोड़ा नहीं जा रहा था।मरीज प्यारेलाल ने बताया कि आज सुबह उन्हें 3 घंटे से अधिक
समय तक बैरियर पर ठंड में रोका गया। इस दौरान उन्हें काफी पीड़ा हुई।

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