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जयराम बोले-आपदा प्रबंधन के लिए 48 हजार से अधिक युवाओं को देंगे ट्रेनिंग

जयराम बोले-आपदा प्रबंधन के लिए 48 हजार से अधिक युवाओं को देंगे ट्रेनिंग

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शिमला। सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दस से पंद्रह युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रकार पहले चरण में 48,390 युवाओं को बचाव कार्य और पीड़ितों को प्राथमिक उपचार देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वह आज यहां लद्दाख (Ladakh), हिमाचल, उत्तराखंड (Uttarakhand) और जम्मू-कश्मीर (J&K) राज्यों के हितधारकों के लिए ‘‘पहाड़ी शहरों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियां’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के सहयोग से राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और हिप्र. विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद् कर रही है।



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सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने कहा कि सुरक्षित घरों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 16,130 बढ़ईयों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्पताल सुरक्षा योजना के अंतर्गत एक योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावी सेवाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने कहा कि आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण है। राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष स्थापित करने पर विचार करेगा, ताकि प्रभावित समुदाय को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए धनराशि जारी की जा सके। उन्होंने इस अवसर पर एसडीएमए द्वारा तैयार स्कूल प्रबंधन के दिशा-निर्देशों पर एक पुस्तिका, आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निर्माण प्रथाओं पर दो वीडियो जारी किए।

शहरी विकास, आवास और नगर नियोजन मंत्री सरवीण चौधरी ने विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों में घरों के निर्माण में पारंपरिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि सचिवालय, उपायुक्त कार्यालयों, दमकल केंद्रों, पुलिस थानों, दूरसंचार नेटवर्क, महत्वपूर्ण पुलों और पानी के टैंकों आदि जैसे जीवन रेखा भवनों को मजबूत बनाने की जरूरत है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने कहा कि विकास कार्य इस प्रकार होने चाहिए कि उनसे आपदाओं का खतरा न बढ़े। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ओंकार शर्मा ने कहा कि एनडीएमए की हिमालयी राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि ये राज्य अधिकतम प्राकृतिक आपदाओं के शिकार बनते हैं। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर और महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य प्रो. रवि कुमार सिन्हा ने पहाड़ी राज्यों में आपदा जोखिम प्रबंधन और हिमाचल प्रदेश में भूकंप के जोखिम पर एक विस्तृत पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी।

राजस्व-आपदा प्रबंधन के निदेशक एवं विशेष सचिव डीसी राणा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्राधिकरण का प्रयास सुरक्षा की संस्कृति का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय इस कार्यशाला में खतरनाक आपदाओं के मूल्यांकन और प्रबंधन पर चार तकनीकी सत्र होंगे, जिनमें पहाड़ी शहरों में भवन उप-कानूनों के अनुपालन में सुधार, आपदा न्यूनीकरण, तैयारियों और आपदा प्रतिक्रिया व वसूली में सुधार पर चर्चा होगी।

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