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TCP BILL: अब जुर्माने के साथ नियमित हो सकेंगे अवैध भवन

TCP BILL: अब जुर्माने के साथ नियमित हो सकेंगे अवैध भवन

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शिमला। प्रदेश में बिना नक्शों के बने हुए भवनों को नियमित करने को लेकर प्रदेश सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में कई माह लंबित रहे विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना जारी होने के बाद अब भवन जहां हैं, जैसे हैं के आधार पर नियमित होंगे। योजना के तहत भवन को नियमित करने के लिए स्ट्रक्चर डिजाइन की शर्त बनी रहेगी। अवैध रूप से बने भवनों को नियमित करने के लिए नगर निगम सीमा में दो तरह के दाम लगेंगे। इसके तहत जिन भवन मालिकों ने नगर निगम से इजाजत लेने के बाद भवन निर्माण किया है, लेकिन सैटबैक में डेविएशन है, उन्हें 800 रुपये प्रति मीटर की दर से जुर्माना अदा करना होगा।

  • राज्यपाल से मंजूरी के बाद सरकार ने जारी की अधिसूचना 
  • अब भवन जहां हैं, जैसे हैं के आधार पर नियमित होंगे
  • राज्यभर के करीब 30 हजार लोगों को होगा इससे फायदा

वहीं नगर निगम की परिधि से बाहर के ऐसे भवनों को नियमित करने की दर 400 रुपये प्रति मीटर होगी। उधर, जिन लोगों ने बिना इजाजत लिए ही भवन बनाए हैं, उन्हें यह दर नगर निगम क्षेत्र में 1000 रुपये प्रति मीटर और नगर निगम से बाहर के इलाकों में 500 रुपये प्रति मीटर की दर से पेनेल्टी लगेगी। कमर्शियल होटल, टूरिज्म, औद्योगिकी और अन्य ऐसे भवन को नियमित करने को नियमितिकरण फीस में 100 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। वहीं, बीपीएल और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के भवनों को नियिमत करने को नियमितिकरण की फीस में 75 फीसदी की कमी की जाएगी। भवनों को नियमित करने के दौरान भवन मालिक को शपथ पत्र देना होगा कि उसकी जमीन को लेकर किसी भी तरह का कोई मामला कहीं दर्ज नहीं हैं और न ही उसने सरकारी या फिर किसी दूसरे की जमीन पर कब्जा कर भवन निर्माण किया है। यदि ऐसा है तो फिर भवन नियमित नहीं होगा। ग्रीन एरिया और हेरिटेज क्षेत्र में बने भवनों को नियमित करने को लेकर किसी प्रकार की कोई रियायत नहीं दी जाएगी। टीसीपी की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्यभर के करीब 30 हजार भवन नियमित हो पाएंगे।

गौर हो कि विधानसभा के मानसून सत्र में टीसीपी का यह संशोधन विधेयक पास कर मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था, लेकिन राज्यपाल ने इसे जल्द पास न कर इसे अपने पास रखा। इसके बाद राजनीतिक दलों ने राज्यपाल के पास अपनी गुहार लगाई और सीएम वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने राज्यपाल से भेंट कर इस बिल को जल्द पास करने का आग्रह किया। इसके बाद राज्यपाल ने इस बिल को लेकर कुछ सवाल उठाए और सरकार से जानकारी मांगी। सरकार ने 22 जनवरी को राजभवन को जवाब भेजा। सरकार से जवाब मिलने के बाद 24 जनवरी को राज्यपाल ने इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद अब टीसीपी ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। बताते हैं कि इस विधेयक में भवनों को नियमित करने के लिए स्ट्रक्चर सर्टिफिकेट की शर्त अभी भी बनी रहेगी। स्ट्रक्चर अभियंता के भवन के पूरी तरह सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र देने के बाद ही सरकार किसी भवन को नियमित कर सकेगी। 1977 के टीसीपी कानून में संशोधन का मकसद से अवैध भवनों को नियमित करना था। संशोधन की अवधि इसके अधिसूचित होने के बाद एक वर्ष तक रहेगी। इससे स्पष्ट है कि टीसीपी कानून में किया गया संशोधन एक साल तक ही वैध होगा। इसके बाद इसे निरस्त माना जाएगा।

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