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SC में बोली Himachal Govt, मैच्योर पेड़ न काटे तो रुक जाएगा वनों का विकास

SC में बोली Himachal Govt, मैच्योर पेड़ न काटे तो रुक जाएगा वनों का विकास

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लोकिंदर बेक्टा/शिमला। हिमाचल प्रदेश में हरे पेड़ों के कटान पर लगी पाबंदी हटाने को लेकर राज्य सरकार सुप्रीमकोर्ट पहुंच गई है। सुप्रीमकोर्ट में आज राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट की डबल बैंच ने इस मामले में केंद्र सरकार को चार सप्ताह में जवाब फाइल करने को कहा है। सुप्रीमकोर्ट में इस केस की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र सिंह अत्री कर रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट में आज डबल बैंच में इस मामले पर सुनवाई हुई। सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट के सामने कई तथ्य रखे। उन्होंने कोर्ट से 1500 मीटर तक की ऊंचाई तक के सरकारी जंगल के चीड़, खैर और चौड़ी पत्ती वाले हरे पेड़ों के कटान की इजाजत मांगी।

  • हरे पेड़ों के कटान को लेकर राज्य सरकार पहुंची सुप्रीमकोर्ट
  • सरकारी व वनभूमि से हरे पेड़ों के कटान की मांगी इजाजत
  • कोर्ट की डबल बैंच ने मामले में केंद्र से चार सप्ताह में मांगा जवाब 

उन्होंने सरकार के पक्ष में पेड़ों पर करवाई गई साईंटिफिक रिसर्च का भी हवाला दिया। इस रिसर्स के मुताबिक यदि मैच्योर पेड़ को एक समय के बाद काटा नहीं जाता है तो वह अपने आसपास नए पौधों को उगने नहीं देगा। यानी, रिजनरेशन नहीं होगी। इससे वनों का विकास रुक जाएगा।  राज्य सरकार ने कोर्ट से आग्रह किया कि वह सरकार को सरकारी एवं वन भूमि से हरे पेड़ों के कटान की इजाजत दे।

हिमाचल सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील जितेंद्र सिंह अत्री ने कहा कि उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष प्रमुखता के साथ रखा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। राज्य सरकार ने चीड़, खैर और चौड़ी पत्ती वाले हरे पेड़ों का कटान करने की इजाजत मांग रही है।

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