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Research Scholar बोले, प्रशासन जो फीस ले रहा है, वह तर्क संगत नहीं, बंद करें

Research Scholar बोले, प्रशासन जो फीस ले रहा है, वह तर्क संगत नहीं, बंद करें

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ने आज यहां बैठक कर अपनी कई मांगों पर चर्चा की। एसोसिएशन ने कहा कि विवि प्रशासन उनसे जो फीस ले रहा है, वह तर्क संगत नहीं है और वह बंद कर दी जानी चाहिए। क्योंकि वे पहले ही कोर्स की पूरी फीस जमा कर चुके हैं। उसका कहना है कि दूसरे की थिसिस से मैटर उठाने को लेकर जारी किए गए निर्देश के मद्देनजर विवि प्रशासन के अपना संबंधित साफ्टवेयर तैयार करना चाहिए।

एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित चौहान ने कहा कि विवि प्रशासन शोध छात्रों से हर माह 800 रुपए (कला) और एक हजार रुपए (विज्ञान) विषयों की वसूली कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि वह एम. फिल या पिर पीएचडी करने की फीस पहले ही ले चुका है। इसे देखते हुए उनकी मांग है कि हर माह की जाने वाली इस वसूली को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि विवि में शोध करने वाले विद्यार्थियों को यह नहीं बताया जाता कि कैसे शोध करना है। हालांकि इसके लिए छह माह का कोर्स होता है, लेकिन इस दौरान केवल कुछ कक्षाएं लगाई जाती है और कोर्स का वर्क कैसे किया जाना है, उसके बारे में जानकारी नहीं दी जाती। इसे देखते हुए उनकी मांग है कि रिसर्च वर्क को सुचारू रूप से चलाने को इस तरफ ध्यान दिया जाए।HP University Shimla

भ्रम की स्थिति से निपटने को अपना सॉफ्टवेयर तैयार करे विवि

चौहान ने कहा कि उनकी मांग है कि दूसरे रिसर्च थिसिस से उठाए जाने वाले मैटर के मामले से पैदा हुई भ्रम की स्थिति से निपटने के लिए विवि प्रशासन को अपना सॉफ्टवेयर तैयार करना चाहिए। इससे पता चलेगा कि शौधार्थी ने कितना मैटर दूसरे के शोध पत्र से उठाया है। इससे शोधार्थियों को रिसर्च करने में मदद मिलेगी और उनका समय खराब नहीं होगा। उनका कहना था कि विवि प्रशासन ने आदेश जारी किया है कि शोधार्थी दूसरे की थीसिस से 10 फीसदी तक मैटर कापी कर सकते हैं। इसे देखते हुए ऐसा साफ्टवेयर जरूरी है जो यह बता पाए कि कितना मैटर उठाया गया है।

चौहान ने कहा कि कई विषयों के शोध छात्रों का रिसर्च वर्क लंबित पड़ा है और उनकी मांग है कि इस कार्य को जल्द पूरा करवाया जाए। उनका कहना था कि कई शोधार्थियों को बहुत समय हो गया है, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो रहा है। इसे देखते हुए उनकी मांग है कि शिक्षक जल्द से जल्द रिसर्च को पूरा करवाएं। उन्होंने विवि प्रशासन से यह मांग भी की कि शोधार्थियों को इंटरनेट सुविधा प्रदान की जाए हर विभाग में यह सुविधा होनी चाहिए, ताकि शोधार्थियों को काम करने में आसानी हो। 

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