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कश्मीर ही नहीं मीरपुर-मुजफ्फराबाद-गिलगिट-बलूचिस्तान भी भारत का हिस्सा

कश्मीर ही नहीं मीरपुर-मुजफ्फराबाद-गिलगिट-बलूचिस्तान भी भारत का हिस्सा

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आरएसएस के 91वें स्थापना दिवस और विजयादशमी के शुभ अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पीएम मोदी की तारीफ की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और भारतीय सेना के पराक्रम से आज देश सुरक्षित है।

  • धीरे-धीरे देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं जो भारत के प्रभाव को नहीं चाहती, जिनकी दुकान भाड़ों पर चलती हैं, ऐसी ताकतें दुनिया में हैं जो भारत को आगे बढ़ना देना नहीं चाहती।

उन्होंने कहा कि पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। यहां तक कि मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगिट और बलूचिस्तान भी। भागवत ने कहा कि कश्मीर की उपद्रवकारी शक्तियों को उकसाने का काम सीमा पर से होता है। ये बात किसी से छिपी नहीं है। सारी दुनिया जानती है और उसको अच्छा जवाब हमारे शासन ने दिया है। शासन के नेतृत्व में हमारी सेना ने साहस दिखाया है। फिर एक बार पूरी दुनिया में भारत की सेना की प्रतिष्ठा उंची हो गई. उपद्रवी (पाकिस्तान) को संकेत मिला कि सहन करने की मर्यादा होती है।

 

आखिर बदल गई संघ की यूनिफॉर्म, हाफ के बजाए फुल पैंट में पथ संचलन

आखिरकार 90 साल बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गणवेश बदल गया। संघ के स्वयंसेवकों ने विजयादशमी के मौके पर आयोजित समारोह में खाकी निकर की बजाए ब्राउन फुल पैंट में पथ संचलन (मार्च) किया। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में चल रहे इस समारोह में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी पहुंचे।

  • rss3याद रहे कि खाकी निकर संघ की यूनिफॉर्म में 90 साल से शामिल थी। इस तरह से इस संगठन में एक पीढ़ीगत बदलाव आएगा, जिसे बीजेपी का वैचारिक मार्गदर्शक माना जाता है।
  • संघ ने स्वयंसेवकों के लिए मोजों के रंग को बदलने की भी मंजूरी दे दी है और पुराने खाकी रंग की जगह गहरे ब्राउन रंग के मोजे इसमें शामिल होंगे।
  • हालांकि परंपरागत रूप से शामिल दंड गणवेश का हिस्सा बना रहेगा। जिन राज्यों में अधिक सर्दी पड़ती है वहां ठंड के मौसम में संगठन के स्वयंसेवक गहरे ब्राउन रंग का स्वेटर पहनेंगे।
  • ऐसे एक लाख स्वेटरों का ऑर्डर दिया जा चुका है, संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर संघ के साथ काम करने को लेकर समाज की स्वीकृति बढ़ती जा रही है और सुविधा के स्तर को देखते हुए वेशभूषा में बदलाव किया गया। यह परिवर्तन बदलते समय के अनुरूप ढलना दर्शाता है।

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