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हम नहीं रहें तो क्या होगा अनीतू का

हम नहीं रहें तो क्या होगा अनीतू का

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 शिमला। बुजुर्ग नाना-नानी को इस बात की चिंता सता रही है कि जब वे इस दुनिया में नहीं रहेंगे, तो शारीरिक रूप से अक्षम उनकी नाती का क्या होगा। उनकी नाती की दुनिया नाना- नानी ही हैं, और ये साक्षर भी नहीं हैं। नाना-नानी से बाहर की कोई दुनिया 25 वर्षीय अनीतू ने नहीं देखी है।

  • रामपुर के बुजुर्ग नाना-नानी के सती रही दिव्यांग नाती की चिंता
  • लड़की को नारी निकेतन में शिफ्ट करने की उठने लगी मांग

अनीतू शिमला जिला के रामपुर क्षेत्र के ननखड़ी के कुंगल बाल्टी में एक ढारे में रहती है। नाना-नानी ही उसकी देखभाल करते हैं। लेकिन बढ़ती उम्र के कारण अब उनकी चिंता अनीतू की है। अनीतू के नाना राम सिंह की उम्र 72 वर्ष है और इसी कारण चिंतित हैं कि इस की देखभाल कौन करेगा। वे चाहते हैं कि इस बेटी को कहीं और किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

 कैसे सामने आया मामला  
मामला क्षेत्र के एक वकील बलवंत ठाकुर ने एक स्वयंसेवी संस्था उमंग फाउंडेशन से सांझा किया। rampur-2इस पर संस्था के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव और अन्य पदाधिकारी कुंगल बाल्टी पहुंचे और खुद वस्तुस्थिति जानी। इस दौरान वहां पहुंची टीम के भी रौंगटे खड़े हो गए, जब देखा कि अनीतू कितना नारकीय जीवन जी रही है। टीम के लौटने के बाद आज श्रीवास्तव ने यह मामला मीडिया से साझा किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस लड़की को जल्द किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि कुंगल बाल्टी में अब कभी भी बर्फ गिर सकती है। इसलिए इसे किसी और स्थान पर शिफ्ट किया जाए। श्रीवास्तव ने कहा कि अनीतू न ठीक से बोल पाती है, न चल पाती है और न ही वह ठीक से खुद खाना खा सकती है। नाना-नानी ने इसके लिए अपने घर के पास ही एक ढारा बनाकर रखा है और इसमें उसे रखा जाता है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि वह युवती शौच उसी ढारे में ही करने को मजबूर है। बदबू के कारण आज हालत यह है कि ढारे के पास जाना भी दुभर हो रहा है। इससे लड़की की दयनीय हालत को समझा जा सकता है। ऐसे में सरकार के इस तरफ तुरंत ध्यान देना चाहिए।

पंचायत में भी नाम दर्ज नहीं
अजय श्रीवास्तव कहना था कि इस मामले में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली भी उजागर होती है, क्योंकि किसी ने भी इस की तरफ ध्यान नहीं दिया। इनका कहना था कि इस गांव में जनगणना भी हुई है और उस टीम ने भी इसका तरफ ध्यान नहीं दिया। पंचायत में भी इसका नाम दर्ज नहीं है। इसकी नाम भी इसे जन्म देने के बाद कहीं और जा चुकी है और पिता का कोई पता नहीं है। ऐसे में सारी जिम्मेदारी नाना-नानी पर ही है। उन्होंने ही इसे बचपन से पाला है। लेकिन अब वे खुद लाचार हो चुके हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने इस मामले को सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की प्रधान सचिव अनुराधा ठाकुर से उठाया है। उन्होंने मांग की है कि इस लड़की को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालकर नारी निकेतन में शिफ्ट किया जाए। उनका कहना था कि इस लड़की को तुरंत बचाव व सुरक्षा की जरूरत है। क्योंकि मामला बहुत ही संवेदनशील है और सरकार का यह दायित्व बनता है कि ऐसे गंभीर मामले को त्वरित कार्रवाई की जाए।

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