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Political रंग में रंगा Cafe खाली करवाने का मामला

Political रंग में रंगा Cafe खाली करवाने का मामला

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धर्मशाला। शहीद स्मारक धर्मशाला के साथ लगते सैनिक कैफ़े को खाली करवाने के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। बीजेपी नेता एवं एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा ने प्रशासन की इस कार्रवाई को कांग्रेस नेताओं के इशारे पर की जा रही कार्रवाई करार दिया है।


  • बीजेपी नेता एवं एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा ने खोला प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा
  • कहा अपने चहेतों को लाभ देने के लिए गरीबों के पेट पर मारी जा रही लात

प्रशासन की टीम एसडीएम के आदेशों की अनुपालना करने के लिए जब एक बार फिर से पहुंची तो वहां मौजूद शर्मा ने नायब तहसीलदार से कुछ दस्तावेजों की मांग की, जिन्हें वह नहीं दे सके। इस पर संजय शर्मा ने वांछित दस्तावेज जल्द उपलब्ध  करवाने की मांग की और सारी कार्रवाई नियमानुसार करने की बात कही।

इस मसले पर संजय शर्मा ने कहा कि यह पूरा मामला कांग्रेस नेताओं के इशारे पर किया जा रहा है। वर्षों से कैफ़े चला रहे एक व्यक्ति को बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक गरीब व्यक्ति से यह कैफ़े छीनकर किसी नेता के चहेते को दिया जाना है, इसलिए प्रशासन भी दवाब में जल्दी-जल्दी कार्रवाई करने को उतारू है। शहर में कई ऐसी संपत्तियां हैं जो की कांग्रेस के चहेतों ने दबा रखी हैं, उन्हें तो कोई नहीं पूछ रहा, जबकि गरीबों को तंग किया जा रहा है। कांग्रेस के लिए मानवीय मूल्यों की वजाए अपने चहेतों को तरजीह दे रही है। संजय शर्मा ने कहा कि जिस तरह स्टेडियम पर कब्जा करने के लिए कांग्रेस ने प्रयास किए थे, आज भी एक गरीब की रोजी रोटी छीनने के लिए ऐसे ही प्रयास किए जा रहे हैं।

Sainik Cafe खाली करवाने आई Team खाली हाथ लौटी

धर्मशाला। प्रदेश के एकमात्र शहीद स्मारक के साथ चल रहे सैनिक कैफ़े को खाली करवाने आई टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। प्रशासन की टीम एसडीएम के आदेशों की तामील करने के लिए नायब तहसीलदार की अगुवाई में प्रशासन और पुलिस की टीम इस कैफ़े को खाली करवाने पहुंची थी, लेकिन कैफ़े संचालक और अन्य लोगों के जबरदस्त विरोध के चलते इस टीम को खाली हाथ लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

  • एसडीएम के आदेशों की तामील करवाने पुलिस के साथ पहुंचे थे नायब तहसीलदार
  • खाली करने का कोई पूर्व नोटिस नहीं देने का लगाया आरोप

इस गहमागहमी में सैनिक कैफ़े में खासी भीड़ जमा हो गई। कैफ़े संचालकों और प्रशासनिक टीम के बीच इस मसले को लेकर काफी कहासुनी भी हो गयी।  कैफे संचालक रणजीत सिंह का कहना है कि प्रशासन पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आया है और यह सब राजनीतिक दबाव के चलते किया जा रहा। यदि यह कैफ़े खाली भी करवाना है तो पूर्व नोटिस दिया जाना चाहिए था जो की उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।
आखिर क्या है मामला

रणजीत सिंह ने बताया कि उन्हें वर्ष 1990 में यह कैफ़े पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड ने उन्हें लीज पर दिया था। 1992 में जब उनकी लीज समाप्त हो गई तब वह इसे छोड़ने को तैयार थे। उस समय बोर्ड ने उन्हें यह कैफ़े चलाने के लिए लोन भी दिया और काम नहीं होने की वजह से ये किश्त भी नहीं अदा कर पा रहे थे। इसके बावजूद बोर्ड ने उन्हें 250 रूपये मासिक किराये पर उन्हें इस कैफ़े का संचालन करने की इजाजत दी। वर्ष 1996 में पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड ने इस कैफ़े को खाली करने के लिए मामला दायर किया। इस पर 2001 में एसडीएम कोर्ट का फैसला आया और कोर्ट ने 600 रूपये मासिक किराया अदा करके इस कैफ़े को चलाने की इजाजत दी। वर्ष 2005 में इन्होंने 10 फीसदी किराया बढ़ा दिया और 2014 तक 660 रुपए किराया देते रहे। उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड ने 2014 में फिर से एसडीएम कोर्ट में मामला दायर किया। इस मामले में कोर्ट ने 9 जनवरी 2017 को यह कैफ़े खाली करने का फैसला सुनवाया,जिसके खिलाफ उन्होंने डिविजनल कमिश्नर के पास अपील दायर की है। इस अपील पर आज ही बहस भी होनी है लेकिन प्रशासन जबरदस्ती खाली करवाने पर तुला हुआ है।

 नोटिस दिया गया था : एसडीएम  

इस बारे में एसडीएम धर्मशाला श्रवण मांटा का कहना है कि कैफ़े खाली करवाने का नोटिस जारी किया गया था। इसी नोटिस के खिलाफ पार्टी ने ऊपरी अदालत में अपील दायर की है। यह क़ानूनी प्रक्रिया है जिसे पूरा किया जा रहा है।

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