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AIADMK उठापटकः E Palanisamy नए नेता, Panneerselvam निष्कासित

AIADMK उठापटकः E Palanisamy  नए नेता, Panneerselvam निष्कासित

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा AIADMK महासचिव वीके शशिकला को चार साल की सजा सुनाने के बाद पार्टी ने शशिकला के करीबी ई पलानीसामी को विधायक दल का नया नेता चुना है। साथ ही तमिलनाडु के कार्यवाहक cm ओ पनीरसेल्वम को पार्टी ने निकाल दिया गया है। इससे पहले आज सुबह  Supreme Court ने आज अहम फैसला सुनाते हुए अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार देते हुए चार साल जेल की सजा सुनाई । साथ ही वह 6 साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएगी। साथ ही उन्हें  AIADMK महासचिव के पद से भी हाथ धोना होगा। आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक High Court से बरी होने के बाद राज्य सरकार ने Supreme Court में अपील की थी। 


  • शशिकला को 4 साल जेल की सजा सुनाई गई है। अब शशिकला को जेल जाने के लिए तुरंत सरेंडर करना होगा और वह 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी।

इसी मामले में शशिकला के दो रिश्तेदार इलावरसी और सुधाकरण को भी कोर्ट ने दोषी पाया है और इन्हें भी चार साल की सजा सुनाई गई है। दरअसल, Supreme Court उनके खिलाफ 21 साल पुराने 66 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने शशिकला और जयललिता को 2015 में बरी कर दिया था। कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

इससे पहले शशिकला ने रिसॉर्ट में 120 विधायकों से मुलाकात की, जो करीब एक हफ्ते से यहीं रह रहे हैं। शशिकला ने इनसे कहा कि सब कुछ ठीक दिख रहा है। हम ही आगे सरकार चलाएंगे। लेकिन अब शशिकला के दोषी करार होने के बाद तमिलनाडू की राजनीति में उठता तूफान थमता नजर आ रहा है।

आखिर क्या था मामला

1991-1996 के बीच जयललिता के सीएम रहते समय आय से अधिक 66 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने के मामले में सितंबर 2014 में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने जयललिता, शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को चार साल की सजा और 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस मामले में शशिकला को उकसाने और साजिश रचने की दोषी करार दिया गया था। लेकिन मई, 2015 में कर्नाटक High Court ने जयललिता और शशिकला समेत सभी को बरी कर दिया था. इसके बाद कर्नाटक सरकार, डीएमके और सुब्रमण्यम स्वामी ने High Court के आदेश को Supreme Court में चुनौती दी थी। Supreme Court ने चार महीने की सुनवाई के बाद पिछले साल जून में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

Supreme Court में कर्नाटक सरकार की दलील थी कि High Court का फैसला गलत है और High Court ने बरी करने के फैसले में मैथमैटिकल एरर किया है। Supreme Court को हाईकोर्ट के फैसले को पलटना चाहिए ताकि ये संदेश जाए कि जनप्रतिनिधि होकर भ्रष्टाचार करने पर कड़ी सजा मिल सकती है।

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