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छात्रवृत्ति घोटाला: हाईकोर्ट ने CBI-प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस, सील्ड कवर में रिपोर्ट दायर करने के आदेश

छात्रवृत्ति घोटाला: हाईकोर्ट ने CBI-प्रदेश सरकार को भेजा नोटिस, सील्ड कवर में रिपोर्ट दायर करने के आदेश

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शिमला 18अक्तूबर। सीबीआई (CBI) द्वारा हिमाचल (Himachal) में 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले (Scholarship scam) की जांच सिर्फ 22 शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित किये जाने पर प्रदेश हाई कोर्ट (High court) ने गंभीरता से लिया है। जनहित में दायर याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में कुल 2772 शैक्षणिक संस्थान है लेकिन प्रदेश सरकार ने सिर्फ 22 शैक्षणिक संस्थानों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है। चीफ जस्टिस एल नायायण स्वामी और जस्टिस धर्मचंद चौधरी की बेंच ने प्रदेश सरकार सहित सीबीआई को नोटिस (Notice) जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

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सीबीआई की और से अदालत से गुहार लगाईं गई कि चूंकि वह मामले कि जांच कर रही है तो इस स्थिति में सीबीआई को सील्ड कवर में रिपोर्ट दायर करने की अनुमति दी जाए ताकि उनके द्वारा की गई जांच सार्वजानिक ना हो। कोर्ट ने सीबीआई की इस गुहार को स्वीकार किया और सील्ड कवर (sealed cover) में रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए। याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक और सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की आगामी सुनवाई 14 नवम्वर को निर्धारित की गई है। जनहित में दायर याचिका में प्रार्थी ने छात्रवृत्ति घोटाले बारे दैनिक समाचार पत्रों में छपी खबरों को भी सलंगन किया है। प्रकाशित खबरों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी को छानबीन में पता चला है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों व निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति हड़पने के लिए बाकायदा एक रैकेट चल रहा था। इसके लिए अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति जारी करने के लिए दस फीसदी तक कमीशन लेते थे।

याचिका में सलंगन खबरों के अनुसार जांच में पता चला है कि कमीशन का यह खेल होटलों में चलता था। यहां पर स्कॉलरशिप जारी कराने की एवज में निजी संस्थान विभाग के अधिकारियों को कमीशन का पैसा देते थे। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि इस खेल में कितने लोग शामिल थे और कमीशन कितने लोगों में बंटता था। इस बात की तस्दीक निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों से पूछताछ में भी हो चुकी है। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के अधीक्षक अरविंद राज्टा सीबीआई के रडार पर आए। सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। निचले स्तर के अधिकारी- कर्मचारी फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे। जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत निजी ई-मेल आईडी से छात्रवृत्ति के काम को अंजाम दिया जाता था।

 

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