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स्कॉलरशिप घोटाला: पहले होगी एफआईआर, फिर सीबीआई के पास जाएगा मामला

स्कॉलरशिप घोटाला: पहले होगी एफआईआर, फिर सीबीआई के पास जाएगा मामला

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शिमला। पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए स्कॉलरशिप घोटाले में प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। हालांकि सरकार ने इसकी जांच के लिए सीबीआई को फाइल भेजी थी, लेकिन सीबीआई ने यह कह कर फाइल वापस लौटा दी कि पहले सरकार अपने आधार पर एफआईआर दर्ज करे। उसके बाद ही सीबीआई अपनी कार्रवाई शुरू करेगी।

  • सरकार ने शिक्षा विभाग को एफआईआर दर्ज करवाने के दिए निर्देश

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीबीआई से केस वापस आने के बाद ही सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि पुलिस थाने में इसकी एफआईआई दर्ज करवाएं।


उल्लेखनीय है कि प्रदेश के एससी और एसटी छात्रों की स्कॉलरशिप में 215 करोड़ का घोटाला सामने आया था। मामला सबसे पहले लाहुल-स्पीति में आया। उसके बाद ही यहां के स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने सरकार से इसकी जांच करने की अपील की थी। सरकार ने बिना किसी एफआईआर के ही मामला सीबीआई को सौंप दिया था। बाद में सीबीआई ने केस सरकार को वापस लौटा दिया। ऐसे में अब उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर मामले पर एफआईआर दर्ज होगी, उसके बाद सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को ही सौंपेगी।

ऐसे हुआ घोटाला

निजी विश्वविद्यालय राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों की एडमिशन के लिए पहुंचते हैं। यहां पर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए फार्म भरवाएं जाते हैं। इसमें काउंसलिंग के लिए छात्रों के हस्ताक्षर भी करवाए जाते हैं। इन्हीं फार्मों में बैंक में खाता खोलने का फार्म भी होता है। निजी कॉलेज या विश्वविद्यालय चतुराई से छात्रों के फोटो, आधार नंबर से लेकर हस्ताक्षर ले लेते हैं। इन सभी एससी, एसटी छात्रों की फर्जी एडमिशन अपने संस्थान में दिखाते हैं।

बैंक में खाता खोलते समय इन छात्रों का एड्रेस संस्थान का दिया जाता है और फोन नंबर भी संस्थान के किसी कर्मचारी का दे दिया जाता है। पिन से लेकर एटीएम का स्कॉलरशिप घोटाले का दुरुपयोग किया जाता है। इस तरह से केंद्र से मिली स्कॉलरशिप पात्र छात्रों के बजाय संस्थान संचालक डकार रहे हैं।

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