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स्काउटिंग एक नवीन चेतना

स्काउटिंग एक नवीन चेतना

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स्काउटिंग एक तरह के आंदोलन जैसा ही रहा है। एक ऐसा आंदोलन, जिसमें बच्चों का संपूर्ण विकास किया जाता है। स्काउटिंग के जनक रॉबर्ट स्टीफेंस स्मिथ बैडन पॉवेल थे। भारत में स्काउटिंग एनीबेसेंट के द्वारा शुरू की गई। अब भारत में स्काउट और गाइड संस्था है। लड़कों के लिए स्काउट और लड़कियों के लिए गाइड शाखा की व्यवस्था इसके तहत रखी गई है। देखने में सामान्य सा दिखने वाला यह संगठन दुनिया भर के कई युवा संगठनों में से एक है।


रोचक यह कि सेना में स्काउट का अर्थ था गुप्तचर, पर सेना के सीमित क्षेत्र से स्काउटिंग को खींच कर ले आने का श्रेय पॉवेल को ही जाता है। वह सन 1900 का वक्त था जब दक्षिण अफ्रीका में बोर युद्ध के दौरान पॉवेल को छोटे बच्चों की असीम शक्ति, साहस, कर्तव्य परायणता और निष्ठा का परिचय मिला। उन्हें लगा कि बालक युद्धकाल और शांतिकाल दोनों वक्तों में संसार को लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने ब्राउन सी नामक टापू पर पहला शिविर मात्र 20 बालकों को लेकर लगाया और यह काफी सफल भी रहा। न 1910 तक भारत में इस संस्था में अंग्रेज तथा एंग्लोइंडियन बच्चों को ही प्रवेश मिलता था पर 1913 में श्रीराम बाजपेयी ने स्काउटों का एक स्वतंत्र दल बनाया। आगे चलकर 1913 में पूना में लड़कियों को भी गर्लगाइड बनने का सौभाग्य मिला और 1920 तक भारत में स्काउटिंग के कई स्वतंत्र संगठन बन गए।


कायदे से देखें तो यह नवयुवकों के लिए स्वयंसेवी गैरसरकारी शैक्षिक आंदोलन है जो किसी भी मूल जाति और वंश के भेद-भाव से मुक्त है। स्काउटिंग व्यक्ति में छिपे गुणों को उभारती है। बाल्यकाल से ही कुशलता व प्रभावी गुणों का रोपण करके, युवा पीढ़ी में मानवीय गुणधर्मिता को विकसित करने की स्काउटिंग में क्षमता है। अगर आप अपने बच्चों में सकारात्मक सोच और नजरिया विकसित करना चाहते हैं तो उसके लिए स्काउटिंग सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि स्काउट्स के लिए रोज एक अच्छा कार्य करने का नियम है। उनकी शिक्षा में चरित्र निर्माण, समाजसेवा, आरोग्य के नियम, ईश्वर में विश्वास तथा दूसरों के धार्मिक विश्वासों का सम्मान रखना है। वे अपनी दिनचर्या का रिकार्ड एक डायरी में रखते हैं। स्काउटिंग एक नवीन चेतना का संचार करती है। क्या आज के दौर में बिगड़ते जा रहे संस्कारों को थामना आवश्यक नहीं है …? अगर हां तो अपने बच्चों को स्काउटिंग के लिए प्रोत्साहित करें।

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