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In House Politics-फिट बैठा, स्टोक्स-कौल सिंह का दांव

In House Politics-फिट बैठा, स्टोक्स-कौल सिंह का दांव

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शिमला। आखिर सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स और स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह अपनी चाल चलने में सफल हो ही गए। इन दोनों नेताओं की अपने-अपने जिलों के मुखियाओं के सबको साथ न लेकर चलने की कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी से की गई शिकायत का असर हुआ है। शिमला जिला कांग्रेस (ग्रामीण) से केहर सिंह खाची और संगठनात्मक जिला मंडी से पूर्ण ठाकुर की अपने-अपने पदों से छुट्टी इसका प्रमाण है। हालांकि इन दोनों प्रदेश कांग्रेस कमेटी में उपाध्यक्ष बनाकर एडजस्ट किया गया है, लेकिन जो ठसक जिलाध्यक्ष की अपने जिला में होती है, वह प्रदेश उपाध्यक्ष बनने से नहीं रहती। क्योंकि टिकट के मामले में जिला इकाई का अहम रोल रहता है।

  • शिकायत के बाद दो बड़े नेताओं पर कार्रवाई
  • केहर सिंह खाची, पूर्ण ठाकुर को जिला अध्यक्ष से हटाया

गौर हो vidyaकि प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी अंबिका सोनी के पिछले शिमला दौरे के दौरान स्टोक्स और कौल सिंह ने अपने-अपने जिलों में संगठन के कामकाज को लेकर शिकायतें की थी। दोनों नेताओं ने जिलाध्यक्षों के मनमानी करने और सबको साथ न लेकर चलने का आरोप लगाया था। लेकिन हुआ यह तब से जब से ये दोनों नेता इनसे छिटक गए। क्योंकि खाची और पूर्ण ठाकुर जिलाध्यक्ष बने थे, उस वक्त जहां खाची स्टोक्स के करीबी थे, वहीं पूर्ण कौल सिंह के खास सिपहसालार थे। लेकिन इसके बाद राज्य की राजनीति में हुए परिवर्तन से ये दोनों नेता भी अछूते नहीं रहे। वीरभद्र सिंह के सत्ता पर काबिज होते ही खाची और पूर्ण भी इनके करीब होते चले गए। यह और बात है कि खाची पहले ही वीरभद्र के साथ हो लिए थे, जबकि पूर्ण ठाकुर पिछले वर्ष से खुलकर वीरभद्र सिंह के साथ आए।  खाची और स्टोक्स दोनों एक ही विधानसभा हलके ठियोग से ताल्लुक रखते हैं। खाची भी टिकट की दौड़ में हैं। खाची की सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा से नजदीकी है और उनके आशीर्वाद के बूते खाची भी दौड़ में शामिल हैं। इस बात से स्टोक्स काफी नाराज चल रही हैं। स्टोक्स नहीं चाहती कि उनके रहते ठियोग में कोई और आगे आए। पिछले वर्ष हुए जिला परिषद के चुनाव में भी खाची और स्टोक्स में टकराव हुआ था।congress_ इन दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस लड़ाई में लाभ बीजेपी ने लिया और ये दोनों हाथ मलते रह गए। आज स्थिति यह है कि दोनों नेता आमना-सामना होने से बचते हैं।  उधर, मंडी जिला में भी कमोबेश यही स्थिति थी। वहां भी कौल सिंह के खासमखास रहे और खुद जिसे जिलाध्यक्ष बनाया, उसे हटाने के लिए लग गए। पूर्ण ठाकुर भी कौल सिंह के ही हलके से हैं और इन्होंने भी कौल सिंह से बगावत कर जिला परिषद का चुनाव लड़ा था। इसके बाद से इनके बीच खटास और बढ़ती गई और पूर्ण भी सीधे सीएम की तरफ हो लिए। इससे कौल सिंह भी झटका लगा था और उन्होंने फिर पूर्ण को हटाने की लॉबिंग शुरू की। बताते हैं कि इस खेल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी विश्वास में लिया गया और इसके बाद ही गाड़ी आगे बढ़ पाई। स्टोक्स ने भी सुक्खू से मिलकर खाची को हटाने के लिए व्यूरचना रची। इसके तहत पहले स्टोक्स ने अपने ठियोग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर अपने करीबी की तैनाती करवाई और फिर जिलाध्यक्ष को चलता करने को दबाव बढ़ाया। इसके बाद दिल्ली से फरमान आ गया और इन दोनों को बदला गया।

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