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चुनावी राजनीति से Stokes की इस तरह विदाई की कल्पना शायद ही किसी ने की हो…

चुनावी राजनीति से Stokes की इस तरह विदाई की कल्पना शायद ही किसी ने की हो…

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लोकिन्दर बेक्टा, शिमला। प्रदेश कांग्रेस की सबसे उम्र दराज और वरिष्ठ नेता विद्या स्टोक्स की चुनावी  राजनीति से इस तरह विदाई की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। उनके साथ उम्र के इस पड़ाव पर जो हुआ, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने जिस तरह से हलकेपन में चुनाव और प्रत्याशियों के चयन के मामले को लिया, उसी का यह परिणाम माना जा रहा है। वहीं, राजनेता और कार्यकर्ता मैडम स्टोक्स जैसी कद्दावर नेता की इस तरह चुनावी  राजनीति से विदाई से मायूस हैं। आठ बार की विधायक विद्या स्टोक्स, जो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की खासमखास और किचन केबिनेट भी  मानी जाती हैं, उनके साथ ही जिस तरह की ”राजनीति” हुई और उनका नामांकन रद्द हुआ, वह कईयों को हजम भी नहीं हो रहा है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो स्टोक्स जैसी शख्सियत की चुनावी  राजनीति से इस तरह से विदाई कतई भी सही नहीं मानी जा सकती और इसका आने वाले समय में पार्टी को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। उनका मानना है कि समर्थकों में जो संदेश एक बार चला जाता है उससे उन्हें बाहर निकालना आसान नहीं रहता।

कांग्रेस की ठियोग विधानसभा सीट पर आए उतार-चढ़ाव से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा

ठियोग विधानसभा सीट पर कांग्रेस के भीतर पिछले कई दिनों में जिस तरह से उतार-चढ़ाव आए, उसने पार्टी कार्यकर्ताओं में कोई जोश भरने का काम नहीं किया, बल्कि उनसे मनोबल को उलटा गिराया ही है। पहले इस सीट से सीएम वीरभद्र सिंह का नाम आना और उनकी यहां से चुनाव लड़ने को हां कहना और फिर हाईकमान द्वारा उन्हें से अर्की शिफ्ट करने से ही कार्यकर्ता मायूस हो गए थे। राजनीतिक हलकों में चर्चा ही है कि जिस दिन वीरभद्र सिंह को अर्की से उतारा गया, उसी दिन इस सीट की अगली पटकथा दिल्ली में लिख दी गई थी। लेकिन बीच में नए मोड़ आए और स्टोक्स ने खुद चुनाव न लड़ने पर वहां से विजयपाल खाची को उतारने की बात कही। बताते हैं कि इस पर हाईकमान राजी भी हुआ था, लेकिन फिर बीच में दीपक राठौर का नाम सूची में आया और वहां से राजनीति में फिर नया टर्न आया, जब स्टोक्स ने कहा कि दीपक के स्थान पर वे खुद ही इस सीट से लड़ेंगी। इसके बाद कल उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया, लेकिन आज वह रद्द हो गया। इसके पीछे कारण क्या रहे, यह तो अभी पता नहीं, लेकिन इसने स्टोक्स की चुनावी राजनीति से इस तरह की विदाई को कोई भी पचा नहीं पा रहा है।


आज के इस घटनाक्रम ने इस हलके के पार्टी कार्यकर्ताओं को भी बड़ा झटका दिया है। क्योंकि स्टोक्स का जो लगाव हलके के लोगों और कार्यकर्ताओं से था, उसे पाने में उनकी दशकों की मेहनत थी।आज उनके नामांकन पत्र रद्द होने से हजारों समर्थकों में निराशा छा गई है। स्टोक्स समर्थक इसे पार्टी नेताओं की साजिश मान रहे हैं और इससे वे इतने खफा हैं कि अब वे कोई बड़ा कदम भी उठा सकते हैं। ऐसे में अब नजरें इस पर टिकी हैं कि अब आगे वे क्या कदम उठाएंगे।

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