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Ayodhya में राम मंदिर की नींव रखने के लिए यह ‘अशुभ घड़ी’: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

Ayodhya में राम मंदिर की नींव रखने के लिए यह ‘अशुभ घड़ी’: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

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नई दिल्ली। ज्योतिषपीठाधीश्वर और द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम मंदिर (Ram Mandir) की आधारशिला रखने के लिए 5 अगस्त के मुहूर्त पर सवाल उठाया है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर की नींव रखने के लिए यह ‘अशुभ घड़ी’ है। शंकराचार्य ने कहा, ‘हम राम मंदिर के ट्रस्ट में कोई पद नहीं चाहते केवल चाहते हैं कि मंदिर ठीक से बने और नींव सही समय पर रखी जाए।’ शंकराचार्य ने कहा कि आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के उत्तम काल खंड में अच्छा काम किया जाता है।

भाद्रपद माह में शुरूआत करना विनाश का कारण बनता है

उन्होंने कहा, 5 अगस्त की तिथि हिंदू कैलेंडर के दक्षिणायन भाद्रपद माह में पड़ रही है। 5 अगस्त को कृष्ण पक्ष की दूसरी तिथि है। शास्त्रों में भाद्रपद माह में घर/मंदिर के निर्माण की शुरूआत करना निषिद्ध है। उन्होंने कहा कि विष्णु धर्म शास्त्र के अनुसार, भाद्रपद माह में शुरूआत करना विनाश का कारण बनता है। ‘दैवाग्ना बल्लभ ग्रन्थ’ कहता है कि भाद्रपद में बनाया गया घर गरीबी लाता है। शंकराचार्य ने कहा कि वास्तु राजाबल्लभ के अनुसार, भाद्रपद की शुरूआत शून्य फल देती है। उन्होंने आगे कहा कि अभिजीत मुहूर्त के कारण इसे शुभ मानना भी सही नहीं है। शंकराचार्य ने कहा, ‘जब तक सूर्य कर्क राशि में स्थित है, शिलान्यास श्रावण के महीने में ही किया जा सकता है, न कि भाद्रपद माह में।’

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भड़क उठे अयोध्या के संत, दी शास्त्रार्थ की चुनौती

वहीं उनके मंदिर के नींव पूजन की तारीख व समय पर सवाल उठाने पर अयोध्या के संत भड़क उठे हैं। अयोध्या के संत इस मुद्दे पर सीधे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज को शास्त्रार्थ की चुनौती दे रहे हैं। उनका कहना है कि हनुमान चालीसा से लेकर ऋग्वेद तक अगर स्वरूपानंद सरस्वती को सबका ज्ञान है तो यहां आकर सिद्ध करें कि पांच अगस्त को भूमि पूजन करना गलत है। संतों ने चुनौती दी है कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती यह सिद्ध करें कि भाद्र पक्ष की भादों अशुभ होती है। राम जन्म भूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि भादों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और यह संपूर्ण मास शुभ होता है। जिस माह में देवता अवतार लेते हैं, उस माह को शुभ माना जाता है।

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