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Shahpur की Politics की जंग अभी होगी और दिलचस्प

Shahpur की Politics की जंग अभी होगी और दिलचस्प

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धर्मशाला।  शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति की जंग और भी दिलचस्प होने वाली है। कांग्रेस के सिपाही और कभी मेजर विजय सिंह मानकोटिया के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले ओंकार राणा भी विधानसभा चुनावों में हर हाल में चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं।


  • ओंकार राणा ने दोहराई शाहपुर से हर हाल में चुनाव लड़ने की बात
  • कांग्रेस हाईकमान से करेंगे टिकट देने की मांग

इसकी घोषणा ओंकार राणा ने कुछ समय पहले ही कर दी थी जब उन्होंने किसान उत्थान मंच शाहपुर का गठन किया था। इस संगठन के माध्यम से ओंकार राणा समय-समय पर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं को प्रशासन और सरकार के सामने उठाते रहे हैं। राणा शाहपुर की राजनीति से लंबे अरसे से जुड़े हुए हैं और मेजर विजय सिंह मानकोटिया से उनकी काफी नजदीकियां थीं। वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में जब मानकोटिया ने बहुजन समाजवादी पार्टी का दामन थामा और खुद धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे, उस समय ओंकार राणा ने बसपा की टिकट पर शाहपुर हल्के से चुनाव लड़ा।

  • कांग्रेस के कर्मठ सिपाही मौजूदा नेतृत्व और शाहपुर की अनदेखी से खफा
  • बसपा की टिकट से 2007 में लड़ा था चुनाव, दूसरे स्थान पर रहे थे

इन चुनावों में जीत सरवीण चौधरी की हुई, लेकिन राणा भी करीब 16 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। मानकोटिया की कांग्रेस में वापसी के बाद राणा कुछ समय तक तो खामोश रहे, लेकिन अब उन्होंने आगामी चुनाव हर हाल में लड़ने की अपनी मंशा जाहिर कर दी है।ओंकार राणा का कहना है कि शाहपुर में मौजूदा नेतृत्व सही नहीं है। यह चाहे बीजेपी के नेता हैं या फिर कांग्रेस के नेता दोनों ही पार्टियों के इन नेताओं ने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी ही की है।

राणा का कहना है कि चुनाव लड़ना उनका अधिकार है और जब उनके विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व हल्के की अनदेखी कर रहा हो तो चुनाव लड़ना और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि निजी तौर पर वह किसी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं का निपटारा नहीं होने से आहत जरूर हैं। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के साथ जुड़े रहे हैं इसलिए सबसे पहले वह कांग्रेस पार्टी हाईकमान से ही उन्हें टिकट देने की मांग करेंगे। यदि पार्टी उनकी मांग को दरकिनार करती है तो भी वह हर हाल में चुनाव जरूर लड़ेंगे। ओंकार राणा के इस रुख से शाहपुर की राजनीति और खासकर यहां कांग्रेस में घमासान और बढ़ेगा। यहां पर पहले ही कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है और इसका खामियाजा भी भुगतती आ रही है। ऐसे में ओंकार राणा का अलग चलना पार्टी के लिए और भी मुश्किलें पैदा कर सकता है।

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