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Shimla: ग्रामीण क्षेत्रों में ‘Barter System’ को दिया जा रहा बढ़ावा, सामान दीजिए-सामान लीजिए

Shimla: ग्रामीण क्षेत्रों में ‘Barter System’ को दिया जा रहा बढ़ावा, सामान दीजिए-सामान लीजिए

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शिमला। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों एवं महिला किसानों को कोरोना संकट (Corona crisis) के समय में लोगों के बचाव के लिए अपना सहयोग प्रदान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक एवं राष्ट्रीय आजीविका मिशन के प्रदेश प्रमुख ललित जैन द्वारा यहा जानकारी आज यहां दी गई।


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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तु विनिमय प्रणाली (barter system) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग तीन हजार महिला किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। जिसके तहत कम से कम भूमि का उपयोग करते हुए किचन गार्डन को विकसित कर गांव में ही आवश्यक सब्जियां उगाई जा सके। ललित जैन द्वारा प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस संदर्भ में युवा व्यवसायियों का उत्साहवर्धन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 11 युवा व्यवसायियों को इन महिला किसानों के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई है तथा महिला किसानों द्वारा तैयार उत्पाद को बाजार में भेजना भी युवा व्यवसायियों द्वारा ही सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि महिलाओं को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।

किसे कहते हैं वस्तु विनिमय प्रणाली
जब किसी एक वस्तु या सेवा के बदले दूसरी वस्तु या सेवा का लेन-देन होता है तो इसे वस्तु विनिमय (Bartering) कहते हैं। जैसे एक गाय लेकर 10 बकरियाँ देना। इस पद्धति में विनिमय की सार्वजनिक (सर्वमान्य) इकाई अर्थात मुद्रा (रूपये-पैसे) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। हालांकि बाजार का मौद्रीकरण होने के बाद से इस विनिमय प्रणाली का इस्तेमाल काफी काम हो गया था। लेकिन अब कोरोना संकट के बीच इसी सिस्टम के सहारे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सुविधा मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं ललित जैन ने आगे बताया कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में लगभग 50 से अधिक स्वयं सहायता समूह शामिल है। जिनके द्वारा 15000 के लगभग मास्क प्रतिदिन तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर बढ़ रही मास्क की मांग को पूरा करने के लिए पूरे प्रदेश में कुल 250 स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 2,000 से अधिक महिलाएं इस कार्य को पूरी निष्ठा से कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख मास्क विभिन्न विभागों एवं अन्य संस्थाओं को दिए जा चुके हैं तथा मास्क बनाने का यह कार्य युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है।

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