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अवैध कब्जेः संशोधित कानून के तहत नक्शे पास करने पर High court की रोक

अवैध कब्जेः संशोधित कानून के तहत नक्शे पास करने पर High court की रोक

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shimla high court order : लेखराज धरटा/ शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए बनाए गए संशोधित कानून के तहत नक्शे पास करने पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग व नगर निगम शिमला को आदेश दिए कि वे “जहां है, जैसा है” वाले नियमितीकरण संशोधन कानून के तहत आए आवेदनों पर कोर्ट के आदेशों के बगैर कोई अंतिम निर्णय न ले। कोर्ट ने यह आदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभिमन्यु राठौर की जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात पारित किए। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर याचिका का जवाब-तलब किया।

  • कहा, आवेदनों पर कोर्ट के आदेशों के बगैर कोई अंतिम निर्णय न लें

कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि क्या सरकार ने नियमितीकरण के संशोधित कानून को पास करवाने से पहले विधानसभा पटल पर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर पारित उन आदेशों को भी रखा था, जिनके तहत इस तरह के नियमितीकरण को गैरकानूनी व कानून के राज के विपरीत ठहराया गया है।


उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 24 जनवरी को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) अधिनियम 2016 राजपत्र में प्रकाशित किया। इस कानून को 15 जून 2016 से लागू माना गया। इस कानून को 24 जनवरी 2018 तक प्रभावी भी बनाया गया। इस अधिसूचना के तहत नियमितीकरण के लिए संबंधित लोगों को 60 दिनों का समय देते हुए आवेदन आमंत्रित किए गए। यह समय अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशित होने से शुरू हुआ। आवेदन के साथ 1000 की फीस भी मांगी गई थी। इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है। इसमें जैसा है जहां है वाली नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना है। इस पॉलिसी का लाभ लेने वालों को किसी क्वालिफाइड स्ट्रक्चरल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट आवेदन के साथ लगाना जरूरी किया गया। ग्रीन व हेरिटेज क्षेत्रों में इस कानून को लागू नहीं किया गया, जो भवन इस संशोधित कानून के तहत भी नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं होंगे उनके बिजली पानी के कनेक्शन काटने और उन्हें गिराने का प्रावधान भी इसमें बनाया गया है। नियमितीकरण फ़ीस भी 400 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। प्रार्थी अभिमन्यु राठौर द्वारा दायर याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि इस तरह के कानूनों से अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे ईमानदार लोग खुद को असहज अनुभव करते हैं।

सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में नाकाम हो गई है और कानून तोड़ने वालों के संरक्षण में काम कर रही है। इस तरह के कानूनों से कानून का राज स्थापित नहीं होता। यह केवल दिमाग का इस्तेमाल न किए जाने की निशानी है जो इस तरह के कानून बनाए जा रहे हैं। याचिका में उक्त संशोधित कानून को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है। प्रार्थी ने उक्त कानून के तहत आए नक्शों को नियमित करने के लिए आवेदनों को कोर्ट में मंगवाने की गुहार भी लगाई है। प्रार्थी ने उन कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है, जिनके कार्यक्षेत्र में उनकी जानकारी होते हुए अवैध निर्माण किए गए व किए जा रहे हैं। मामले पर सुनवाई 17 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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