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अगर आई कोई बड़ी आपदा तो 75 फीसदी तबाह हो जाएगा Shimla

अगर आई कोई बड़ी आपदा तो 75 फीसदी तबाह हो जाएगा Shimla

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शिमला। जब तक स्थानीय सरकार के अधीन सभी संबंधित विभाग न हों तो शहर का विकास नहीं हो सकता। नगर निगम की त्रासदी यह है कि वह पूर्व में एक विभाग की तरह कार्य करता रहा है और जब जनता ने कांग्रेस और बीजेपी को नकार कर तीसरी ताकत को यहां बिठाया तो जाकर यहां स्थिति में परिवर्तन होने लगा और सरकार से लड़कर ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई विंग बनवाया। यह कहना है प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम के महापौर संजय चौहान और टिकेंद्र पंवर का। वे आज यहां प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम में आए थे।  मेयर और डिप्टी मेयर ने कहा कि शिमला शहर की जनता ने उनसे जो उम्मीदें लगाई थी, उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किए और इसमें उन्होंने सफलता भी प्राप्त की।


  • मीट द प्रेस कार्यक्रम में बोले मेयर व डिप्टी मेयर, आपदा से निपटने को करने होंगे कार्य
  • बोले सरप्लस में लाया एमसी, जनता को मूलभूत सुविधा देने के किया अच्छा कार्य 

उन्होंने कहा कि सिटी गवर्नमेंट के जिस कंसेप्ट की बात उन्होंने रखी थी, उसे लेकर सरकार के साथ कई बार विवाद भी होता रहा है। लेकिन आखिर में उन्हें कुछ सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जनता को मूलभूत सुविधा देने के लिए नगर निगम ने अपने स्तर पर अच्छा कार्य किया है और इस संस्थान को सरप्लस पर लाया है। मेयर संजय चौहान ने कहा कि शिमला शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां पर यदि कोई बड़ी आपदा आए तो 75 फीसदी तक नुकसान हो सकता है, लेकिन इससे निपटते हुए नगर निगम को कार्य करना है। उनका प्रयास रहा है कि शहर में स्लम को व्यवस्थित किया जाए और वहां पर बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाए। उनका कहना था कि शिमला शहर में पीलिया फैलने के बाद कई अहम कदम उठाए गए हैं और यहां की पेयजल वयवस्था के सिस्टम को ठीक किया जा रहा है।

शिमला को पानी पहुंचाने वाली योजनाओं में पानी की लीकेज को ठीक किया जा रहा है और इसकी शुरूआत गिरी परियोजना से की गई है। इसकी दो हजार मीटर लाइन को बदला जा रहा है और इसके बाद गुम्मा पेयजल योजना की लाइन भी बदली जा रही है। चौहान ने कहा कि उन्होंने स्मार्ट सिटी को लेकर बड़ी लड़ाई लड़ी है और मामला हाईकोर्ट तक गया था। इस बार शिमला फिर स्मार्ट सिटी की दौड़ में है और वे जनता के सहयोग से इसे तैयार कर रहे हैं। इसके तहत वे अब तक एक लाख लोगों के बीच जा चुके हैं और उनके सुझाव लेकर इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाएंगे। शिमला शहर का भिंडी बाजार की तर्ज पर विकास हो, इसके लिए स्मार्ट सिटी में प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य 1.50 लाख लोगों तक पहुंचना है और उम्मीद है कि इस आंकड़े को वे पार करेंगे। 

अप्रत्यक्ष होंगे महापौर और उपमहापौर के चुनाव

शिमला नगर निगम के महापौर और उपमहापौर के चुनाव प्रत्यक्ष के स्थान पर अब अप्रत्यक्ष रूप में होंगे। यानी अब जनता सीधे महापौर को नहीं चुनेगी, बल्कि अब वार्ड पार्षद ही उनका चयन करेंगे। इसे लेकर सरकार ने विधानसभा में नगर निगम एक्ट में संशोधन कर दिया है। इसे लेकर पूछे गए सवाल पर नगर निगम महापौर संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने यह संशोधन उस रिएक्शन के बाद किया है, जिसमें जनता ने कांग्रेस और बीजेपी को ठुकराकर तीसरे विकल्प को चुना था। उन्होंने कहा कि सरकार ने संशोधन कर शहर की जनता के जनमत के विपरीत किया है। नगर निगम महापौर संजय चौहान  2012 में प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए शिमला नगर निगम के मेयर और टिकेंद्र पंवर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए थे। मेयर ने कहा कि 2012 में शहरी निकायों में कई नेता चुनकर आए थे और वे कुछ बड़े नेताओं को चुभने लगे थे और उसके बाद नगर निगम और अन्य शहरी निकायों में संशोधन किया गया।यानी जो ताकत जीतकर आई, उससे कई स्थापित नेताओं को डर लगने लगा था। अब सरकार ने इसमें संशोधन किया है और इसके खिलाफ जनता ही आगे आ सकती है, क्योंकि जनता के अधिकार का हनन हुआ है।  चौहान ने कहा कि शिमला शहर के प्रति सरकार का रवैया हमेशा अड़ंगा लगाने वाला रहा है और इसिलए उनका यहां का कार्यकाल संघर्ष में ही बीता है। शहरी विकास विभाग के सचिव ही कितने बदल गए और जो योजनाएं वे तैयार करवाते, उन पर ब्रेक लग जाती थी। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और कई योजनाएं स्वीकृत करवाई।

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