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कांगड़ा में बढ़ा वन क्षेत्र का दायरा, शिमला पहले पायदान पर खड़ा

कांगड़ा में बढ़ा वन क्षेत्र का दायरा, शिमला पहले पायदान पर खड़ा

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कांगड़ा। हिमाचल हमारा हरा-भरा…इस नारे की तरफ गौर फरमाएं तो प्रदेश में ओपन फॉरेस्ट में 13 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें कांगड़ा जिला में ही 4 वर्ग किलोमीटर का दायरा नए जंगलों का बढ़ा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक बढ़ोतरी शिमला जिला में दर्ज हुई है, जबकि कांगड़ा दूसरे स्थान पर है। सुकून देने वाली बात यह है कि विभिन्न विकास कार्यों के लिए एक हैक्टेयर वन भूमि के उपयोग की स्वीकृति प्रदान करने के लिए अब संबंधित डीएफओ को प्राधिकृत किया गया है।

  • shimla-forestअनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि विभिन्न छोटे विकास कार्यों के लिए एक हैक्टेयर तक की ऐसी वन भूमि जिसमें 75 से अधिक वृक्ष न हों के उपयोग की स्वीकृति वन मंडल अधिकारी अपने स्तर पर प्रदान कर सकता है।
  • इससे पहले तक आमजन को भारी परेशानियों से गुजरना पड़ता था। 13 विकासात्मक कार्यों के लिए वन भूमि को स्थानान्तरण करने का प्रावधान है।

इसके तहत स्कूल, डिस्पेन्सरी या अस्पताल, आंगनबाड़ी, उचित मूल्य की दुकान, विद्युत एवं टेलीफोन लाईन, पानी के टैंक, पीने के पानी की आपूर्ति से संबंधित एवं पानी की पाइपलाइन, वर्षा के पानी को इकट्ठा करने का ढांचा, छोटी सिंचाई कूहल, गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोत, सड़कें, सामुदायिक भवन तथा पारंपरिक व्यवसायिक केन्द्र के निर्माण कार्यों के लिए वन मंडल अधिकारी अपने स्तर पर वन स्वीकृति प्रदान कर पाएंगे। याद रहे कि प्रदेश के कुल 55,673 वर्ग किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्र में से कुल परिभाषित वन क्षेत्र 37,033 वर्ग किलोमीटर है।

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