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Shivangini जाएंगी Antarctica पर धन की कमी रोक रही राह 

Shivangini जाएंगी  Antarctica पर धन की कमी रोक रही राह 

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शिमला। पर्यावरण में हो रहे परिवर्तन से पड़ रहे असर के प्रति जागरूकता अभियान का हिस्सा बनने जा रही है शिंवागिनी सिंह को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  मामला यह है कि क्लाइमेट फोर्स अंटार्कटिका-2018 एक्सपेडिशन का हिस्सा बनने जा रही शिवांगिनी को अंटार्कटिका जाने के लिए स्पांसर नहीं मिल रहे हैं।
अंटार्कटिका का शिवांगिनी का सफर 27 फरवरी से शुरू होना है और यह 12 मार्च तक चलेगा। हालांकि उसने हिमाचल सरकार के संबंधित विभाग और अन्य निगमों से मदद को संपर्क साधा है, लेकिन अभी तक उसे सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है। फिर भी शिवांगिनी ने हिम्मत नहीं हारी है और जैसे-तैसे अंटार्कटिका जाने के लिए जरूरी धन का प्रबंध करने में लगी हैं। अंटार्कटिका जाने वाले इस दल में हिमाचल की वो इकलौती सदस्य है और यह हिमाचल के लिए गर्व की बात भी है, लेकिन सरकारी तंत्र से उन्हें अभी तक मदद का इंतजार है। इस अभियान में जाने पर कुल करीब 14 लाख रुपए खर्च होंगे।

 अंटार्कटिका महाद्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को जानना है मकसद

शिवांगिनी कहती हैं कि इस अभियान का हिस्सा बनना बड़ी बात है और हिमाचल वैसे भी पर्यावरण के प्रति बहुत जागरूक है। उनका कहना था कि अंटार्कटिका अभियान का मकसद जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और अंटार्कटिका महाद्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को जानना है। इसके साथ-साथ देश की भावी पीढ़ी को पर्यावरण में आ रहे बदलाव के प्रति सचेत करना है। साथ ही कैसे पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है, उसके प्रति जानकारी देना है।
शिवांगिनी के मुताबिक इस अभियान में विश्वभर से 70 लोग जाएंगे और जिन्होंने जाना है, उनका चयन हो चुका है। शिवांगिनी इस समय बंग्लुरू में एक निजी कंपनी में कार्यरत है। एनआईटी हमीरपुर की छात्रा रही शिवांगिनी सिंह इस अभियान में जाने की तैयारी भी की है और वहां की परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि अंटार्कटिका जाने के लिए उसे कई चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार का पूरा सहयोग और समर्थन उन्हें मिला है और उनके प्रोत्साहन की बदौलत ही वे इस मकाम तक पहुंच पाई हैं। 

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