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Social Media पर राजनीतिक दलों की फूट जगजाहिर

Social Media पर राजनीतिक दलों की फूट जगजाहिर

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जोगिंद्रनगर। इसे किसी राजनीतिक दल की अंतर्कलह कहें या फिर किसी प्रतिद्वंद्वी सियासी पार्टी की चाल, फिलहाल इस बाबत कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन व्हाट्सएप् पर एक पार्टी के कुछ टिकटार्थियों को लेकर तरह-तरह की बातें वायरल हो गई हैं, जिससे चर्चाओं का बाजार भी गर्म होता दिख रहा है। वायरल हुए मामले में कुछ संभावित टिकटार्थियों के व्यक्तित्व को ‘छलनी‘ करने की पूरी कोशिश की गई है, ताकि किसी न किसी तरह यह बात पार्टी हाईकमान तक पहुंचे और उस पर जांच किए जाने की गुंजाइश बन जाए और उनके टिकट मांगने के रास्ते में रोड़े अटका दिए जाएं। इनमें कुछ टिकटार्थियों को मंडी व कांगड़ा जिला के दो वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के साथ भी जोड़ने का प्रयास किया गया है।


  • एक दूसरे को नीचे दिखाने के लिए खूब हो रहा प्रचार
  • जोगिंद्रनगर में व्हाट्सएप्प पर टिकट के चाहवानों की बातें खूब हो रही वायरल

एक संभावित टिकटार्थी पर तो एनजीओ के नाम पर समाज सेवा का ढोंग रचाने व सरकारी ग्रांट को चूना लगाने के भी आरोप लगाए गए हैं और यहां तक कह दिया गया है कि किसी वरिष्ठ राजनेता के क्षेत्र से संबंध रखने वाले इन महानुभाव ने अब जोगिंद्रनगर में भी घर बना लिया है जो जोगिंद्रनगर से चुनाव लड़ने का इच्छुक है और अगर उन वरिष्ठ नेता को टिकट न मिला तो वह उनके क्षेत्र से भी चुनाव लड़ने की भी इच्छा रखते हैं। हालांकि ऐसा संभव नहीं कि उन राजनेता को टिकट न मिले, लेकिन सोशल मीडिया पर उतरने वाले तत्वों ने अपनी ओर से फूट के बीज बोने के पूरे प्रयास किए हैं। इस कथित टिकटार्थी के एक मित्र पर भी इसमें अंगुली उठाई गई है। इस सबके पीछे किसी की क्या मंशा है यह तो वही बता सकेंगे, लेकिन चर्चाओं में कयास लगाए जा रहे हैं कि एक राष्ट्रीय सियासी दल को कमजोर करने व उनके कार्यकर्ताओं में आपसी फूट डालने का विरोधी पार्टी के लोगों का इसमें हाथ हो सकता है और दूसरी ओर ऐसा भी समझा जा रहा है कि अपनी ही पार्टी के किसी नेता ने यह चाल चलकर अन्य संभावित टिकटार्थियों का कथित ‘बायोडाटा‘ जगजाहिर करने की कोशिश की हो, ताकि अपना टिकट पक्का हो सके। दूसरों की छवि धूमिल करने वाली यह ‘सामग्री‘ दो पेज की है। इसके जवाब में किसी सज्जन ने व्हाट्सएप् पर पोस्ट करके सभी को सावधान करने की कोशिश भी की है तथा साफ किया है कि यह कारस्तानी उन नेताओं की हो सकती है जिनके पैरों तले से जमीन खिसकती जा रही है। उन्होंने लिखा है कि इन नेताओं को अपनी हार सामने दिख रही है इसलिए ऐसी ओच्छी हरकतों पर उतर आए हैं। एक सज्जन ने लिखा है कि यह ‘सामग्री‘ एक पंचायत प्रधान को गुमनाम पत्र के जरिए भिजवाई गई है।

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