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कुछ यादें दूरदर्शन की…

कुछ यादें दूरदर्शन की…

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आज दूरदर्शन की 57 वर्ष का हो गया है। आज ही के दिन वर्ष 1959 में दिल्ली से दूरदर्शन सेवा शुरू हुई थी। इसमें कोई शक नहीं कि दूरदर्शन ने अपने इस कामयाब सफर में कई मुकाम हासिल किए और आज यह दुनिया के सबसे बड़े टेलीविज़न नेटवर्क में से एक है। जरा याद करें ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविजन का वो दौर जब गांवों या शहरों में किसी एक व्यक्ति के घर पर टेलीविजन होता था।  आसपास के घरों के लोग उस घर में अपना पसंदीदा कार्यक्रम देखने के लिए इक्कठे होते थे। tvरामायण, हम लोग, चित्रहार, रंगोली देखने सभी लोग एक कमरे में इक्ट्ठा होते थे। जिसके घर टेलीविजन मतलब वह घर हुआ कुछ खास। उस समय एक खाली कमरे में टेलीविजन रखा होता था, खाली कमरे में रखने का मतलब था कि आसपास के लोग भी आराम से नीचे बैठकर टेलीविजन देख सकते थे और इकट्ठे बैठकर टेलीविजन देखने का अपना ही मजा था। कार्यक्रम के दौरान सिग्नल का जाना भी आम था, फिर एक बच्चा घर की छत पर जाता और ऐंटीना को घुमाकर जोर से कहता आया …… नीचे खड़े दो- तीन बच्चे दौड़ के अंदर जा कर देखते और उसी रौ में जवाब देते …नहीं …। एक बार फिर ऐंटीना घुमाया जाता और अगर सिग्नल आ गया तो वो खुशी कुछ खास होती थी। जिस बच्चे के ऐंटीना घुमाने से टेलीविजन की सिगल्न आ जाता वह कुछ खास होता था यानी एंटीना एक्सपर्ट। फिल्म के बीच में ब्रेक के दौरान महिलाएं झट से अपने छोटे मोटे काम निपटा देती। क्षेत्रीय भाषा की फिल्में देखने का अपना ही मजा था। समझ आए या न आएं बस देखना है। समाचारों से पहले इस बात की की चर्चा होती कि आज न्यूज रीडर कौन होगा। सलमा सुल्तान का बालों में लगा फूल, मंजरी जोशी का हेयर स्टाइल, शम्मी नारंग का पेन जेब में रखना, सरला महेश्वरी, शोभना जगदीश, सबका अपना अलग अंदाज था। अंग्रेजी के न्यूज रीडर्स को धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलते हुए सभी उनके जैसे बोलने का प्रयास करते। सुमीत शर्मा, रिनी खन्ना, मीनू, सुकन्या आदि सभी लाजवाब थे। संडे तो खास होता था सभी के लिए। सुरभि हो या सिद्धार्थ बसु का क्विज प्रोग्राम छोटे- बड़े सबसे पसंदीदा थे। कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल होना मतलब विद्युत विभाग की शामत। सारा दिन बैठकर क्रिकेट मैच देखना और कुछ खाने की फरमाइश करते रहना। जीत गए तो ठीक हार गए तो गलतियां ढूंढना। फुरसत में महिलाओं का अपने पंसदीदा कलाकार के बारे में चर्चा करना। बच्चों का स्कूल में धीरे से अपने सहपाठी को फिल्म की कहानी सुनाना। समय के साथ चैनलों की बाढ़ आई और जहां घर में एक टेलीविजन होता था अब हर कमरे में टेलीविजन,एलईडी हैं। सबकी अंगुलियां रिमोट पर है, एक समय में दो-तीन चैनल के कार्यक्रम का मजा लिया जाता है। जहां पहले न्यूज एंकर संयम से समाचार पढ़ता था वहीं अब चीख- चिल्ला कर समाचार पढ़े जाते हैं। ढेरों चैनल हैं पर सबके कार्यक्रम एक जैसे हैं। समय बदल गया है पर असली मजा तो सब के साथ ही आता था।

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