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स्टेट ड्रग कंट्रोलर ऑफिस पर फूटा Letter Bomb

स्टेट ड्रग कंट्रोलर ऑफिस पर फूटा Letter Bomb

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State drug controller office : बद्दी। औद्योगिक नगर बद्दी स्थित राज्य स्तरीय औषधिक नियंत्रक कार्यालय (स्टेट ड्रग कंट्रोलर ऑफिस) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। प्रदेश के उद्यमियों को यहीं से दवा निर्माण के हर प्रकार लाइसेंस जारी होते हैं और सरकार ने इस कार्यालय को शिमला से करीबन नौ साल पहले शिमला से शिफ्ट करके बद्दी में खोला था। हालांकि राज्य ड्रग कंट्रोलर की कार्यप्रणाली पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन पहली बार हिमाचल प्रदेश के सबसे बडे़ उद्योग संघ ने इसके विरुद्व तीन पन्नों का लंबा चौड़ा पत्र लिखकर ऐसा विस्फोट किया है जो कि चौंकाने वाला है। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित बीबीएन उद्योग संघ ने ड्रग कंट्रोलर कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, उद्योग मंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव उद्योग व प्रधान सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिखकर कई जरूरी मुद्दे उठाए हैं और आरोप जड़ा है कि इसके मनमाने रवैये से प्रदेश से दवा उद्योग रुखस्त हो रहा है और उल्टा पड़ोसी राज्य मालामाल हो रहे हैं।

 

पड़ोसी राज्यों को प्रोत्साहन देकर हिमाचल का गला घोंटने का आरोप

बीबीएन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार दीपक भंडारी ने लिखा है कि हमारी एसोसिएशन उद्योग विभाग व प्रदेश सरकार के साथ मिलकर फार्मा टैस्टिंग लैब, बल्क ड्रग पार्क, बायोटैकनोलोजी पार्क, सीईटीपी, दक्षता केंद्र, महिला व पुरुष छात्रावास चला रही है, लेकिन उसके बाद भी फार्मा जगत उपरोक्त कार्यालय की कार्यप्रणाली से बहुत परेशान है। कथित धक्केशाही व मनमानी के कारण फार्मा कंपनियों को उत्तरांचल शिफ्ट होना पड़ रहा है, जिससे प्रदेश के रोजगार व निवेश पर गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रग कंट्रोलर व स्वास्थ्य विभाग की मनमानी से कुछ ऐसी दवाओं जो कि ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा भी अनुमोदित है की स्वीकृतियां नहीं दी जा रही हैं। जिन उत्पादों की ड्रग कंट्रोलर कार्यालय हिमाचल में अनुमति नहीं दे रहा है वह उत्तरांचल, तमिलनाडू व पांडीचेरी में आसानी से ड्रग लाइसेंस लेकर आसानी से बन रहे हैं। यह हिमाचल के फार्मा उद्योगों से घोर अन्याय है। एसोसिएशन के पदाधिकारी बहुत सारे तथ्यों के साथ शिकायत पत्र में लिखा है कि हिमाचल में भेदभाव का नजारा उस समय देखने को मिल रहा है, जिसमें कुछ उत्पाद चहेते उद्योगों के अप्रूव कर दिए गए जबकि अन्यों को स्वीकृति देने से साफ मना कर दिया गया।

प्रदेश को करोड़ों के राजस्व का नुकसान

दीपक भंडारी ने कहा कि इससे प्रांत के दवा निर्माता गहन निराशा में है, क्योंकि 500 दवा उद्योगों के संचालन केवल एक ही ड्रग कंट्रोलर के नियंत्रण में होने से दवा उद्योगों के संचालकों में भय का माहौल है।  इस कारण से दवा निर्माता यहां निवेश नहीं कर रहे और प्रदेश को करोड़ों के राजस्व का नुकसान भी हुआ है, जिसकी भरपाई होना अब मुश्किल है। वहीं रोजगार पर भी विपरीत असर पड़ा है, जबकि सबसे ज्यादा रोजगार फार्मा उद्योग की प्रदान करता है और यह सीधे सीधे राज्यों के साथ धोखा है। वहीं इस विषय में प्रांतीय ड्रग कंट्रोलर बद्दी नवनीत मरवाह ने कहा कि अभी उनको शिकायत नहीं मिली है। अगर उद्यमियों को कुछ शिकायत है तो मिल बैठकर उसका निराकरण कर दिया जाएगा।

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