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गुस्साए Teachers: हमारी बात नहीं सुनी, अब हम आंदोलन करेंगे

गुस्साए Teachers: हमारी बात नहीं सुनी, अब हम आंदोलन करेंगे

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Teachers Association: शिमला। शिक्षकों की बार-बार हो रही अनदेखी से राजकीय अध्यापक संघ नाराज हो गया है। संघ ने अब अपनी मांगें मनवाने के लिए संघर्ष की राह पकड़ने का मन बना लिया है। बहरहाल, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ (एचजीटीयू) ने नौकरशाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ नौकरशाही द्वारा हर कदम पर अड़ंगा लगाने से नाराज है और उसका आरोप है कि अफसर कर्मचारियों की मांगों को मनाने में रोड़ा बने हुए हैं और अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है।

Teachers Association: सरकार शिक्षकों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं

संघ ने कहा है कि बार-बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी सरकार शिक्षकों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है और इसे देखते हुए अब उन्होंने संघर्ष की राह पकड़ी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने यहां प्रेस कान्फ्रेंस में प्रधान सचिव शिक्षा और निदेशक उच्च शिक्षा के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि सीएम वीरभद्र सिंह ने उनकी मांगों को लेकर विभाग से बैठक करने को कहा था, लेकिन विभाग के प्रधान सचिव ने आज तक ऐसा नहीं किया। वे खुद भी इस संबंध में उनसे मिले थे और कहा था कि सीएम ने कहा है, लेकिन फिर भी कोई बैठक नहीं की गई।

इससे राज्य की नौकरशाही के रवैये का पता चलता है। जो अफसर सीएम की नहीं सुन रहा, वह बाकियों की क्या सुनेगा। शिक्षक नेता ने कहा कि उनकी कई अहम मांगें हैं और इसे पूरा करने में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) आना-कानी कर रहे हैं। उन्हें शिक्षकों की वित्तीय मांगों को पूरा करने में भारी वित्तीय बोझ लगता है, लेकिन अपने लिए यदि कोई लाभ लेना है तो उस वक्त वित्तीय समस्या आड़े नहीं आती। उनका कहना था कि सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

अफसरशाही सबसे बड़ा रोड़ा

चौहान ने कहा कि उनकी समस्याओं को लागू करने में अफसरशाही ही सबसे बड़ा रोड़ा है। चाहे 4-9-14 का मामला हो, या फिर कोई मांग, अफसरशाही ही इसमें रोड़ा अटका रही है। उन्होंने कहा कि सीएम वीरभद्र सिंह का इसमें कोई दोष नहीं है। अफसरशाही सीएम को गुमराह कर रही है और सही तस्वीर पेश नहीं कर रही। उनका कहना था कि जब सीएम के आदेश ही अफसर नहीं मान रहे तो किसके मानेंगे। उन्होंने कहा कि अब संघ ने आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया है और इसकी शुरूआत 27 मई से होगी। उस दिन विधानसभा के बाहर प्रदेशभर के शिक्षक धरना देंगे। इसके बाद 15 जून से हर जिला स्तर पर उनके धरने प्रदर्शन होंगे और आगे की रणनीति उसके बाद बनेगी।

शिक्षक नेता ने कहा कि उन्होंने शिक्षकों की सभी मांगों को लेकर संयुक्त मोर्चा बनाने की पहल की थी, लेकिन शिक्षकों के दूसरे संघों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई। उनका कहना था कि शिक्षकों के दूसरे अधिकतर संघ राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं और केवल सरकार का गुणगान करना चाहते हैं। वे केवल शिक्षकों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और अपनी रोटियां सेंक रहे हैं।

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