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भूतनी का उपकार

भूतनी का उपकार

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story: पंडित जी रोज ही घर से बाहर बने हुए छप्पर के नीचे बैठ कर पूजा करते थे। पाठ करने के बाद भगवान का आचमन करते और लोटे में जो भी पानी बचता उसे वहीं डाल देते। पास में ही एक चूहे का बिल था। चूहा अब वहां नहीं रहता था वह कहीं और चला गया था, पर अब उसमें एक भूतनी रहती थी। पंडित जी का गिराया हुआ पवित्र पानी पीकर वह भूतनी बहुत खुश हुई और बड़े मन से उनका पाठ भी सुनने लगी। फिर हुआ यों कि पाठ सुनते-सुनते उसकी प्रेत योनि समाप्त होने का समय जल्दी आ गया। भूतनी ने सोचा … आखिर पंडित जी ने मेरे ऊपर इतना उपकार किया है तो मुझे भी उनके लिए कुछ करना चाहिए।

एक सुबह वह चूहे के बिल से बाहर निकली और एक सुंदर लड़की का रूप धारण कर लिया। उस समय पंडित जी अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ बैठे थे। दरवाजे पर उसे देख कर हैरान हुए।


-आओ अंदर आ जाओ… कौन हो तुम और तुम्हें क्या चाहिए ? पंडित जी ने पूछा।
– जी मेरा नाम माधवी है। मैं इस संसार में एकदम अकेली हूं… मेरा कोई सहारा नहीं। आप मुझे नौकरी पर रख लें तो उपकार होगा उसने हाथ जोड़ कर कहा। मैं घर का सारा काम कर दूंगी।
-क्या कहती हो पंडित जी ने पत्नी की ओर मुड़कर कहा।
– रख लेते हैं … मैं भी घर के काम और बच्चे को संभालते-संभालते थक जाती हूं।
-ठीक है तुम आज से ही काम पर लग जाओ खाना-कपड़ा हम देंगे और…।
-मुझे वेतन नहीं चाहिए…आपने शरण दे दी यही बहुत है।

अब तो पंडितानी के मजे हो गए। सारा घर एक ही दिन में साफ-सुथरा होकर चमकने लगा। माधवी सुबह ही उठ जाती पूरा घर साफ करती, झाड़ू पोंछा लगाती, कुएं से भरकर पानी लाती और बच्चे को भी देखती।
पंडित के भी दिन बड़े आराम से कटने लगे। पंडितानी भी निश्चिंत हो अपना घर-बार संभालने लगी। माधवी खाना भी बनाती और बच्चे की भी देखभाल करती थी। वह पूरा परिवार उससे बहुत खुश था। पंडित भी अब दूर-दूर पूजा-पाठ कराने जाने लगे।
दो महीने ऐसे ही गुजर गए एक दिन पंडित जी दूसरे गांव पूजा करवाने चले गए। लौटने में उन्हें रात हो गई।
उस रात पंडितानी बच्चे के साथ पलंग पर सो रही थीं और वहीं पास में माधवी चटाई बिछा कर लेटी हुई गहरी नींद में थी।
देर रात गए पंडित जी ने दरवाजा खटखटाया।
-माधवी उठो …दरवाजा खोल दो पंडितानी ने कहा।

माधवी नींद में थी थोड़ा आलस कर गई और वहीं से हाथ लंबा कर चिटकिनी खोल दी।
इतने लंबे हाथ को चिटकिनी तक जाते देख पंडितानी के होश उड़ गए, पर डर के मारे उसने कुछ न कहा। बाद में पंडित से सारी बातें बताईं और कहा जितनी जल्दी इस भूतनी को बाहर करो वही ठीक होगा। पंडित जी फिक्र में पड़ गए।
अगले दिन पूजा करते समय उन्होंने माधवी को बुलाया।
-माधवी तुम सारे ही काम चुटकियों में कर लेती हो पर क्या जो मैं कहूंगा वह भी कर लोगी…?

-क्यों नहीं पंडित जी …माधवी ने उत्साह में कहा। उसी समय एक चुहिया उनके सामने से भागती हुई बिल में चली गई।
-तो क्या इस चुहिया के बिल में भी जा सकती हो… वह अभी अंदर गई है उसे पकड़कर ले आओगी ?
-अभी ले आती हूं कह कर भागती हुई माधवी एकदम छोटी होकर चुहिया के बिल में घुस गई। उसी वक्त पंडित ने उस बिल को पत्थरों से भर दिया और छुटकारे की सांस ली।
कुछ भी कहो वह एक अच्छी भूतनी थी … पंडित ने कहा और फिर पूजा करने लगे।

बांस के जंगल में बांसुरी

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