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गुनगुन की उड़ान

गुनगुन की उड़ान

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लगातार एक हफ्ते से बारिश हो रही थी और बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था। चिड़िया अपने बच्चे को पंखों में छिपाए सोच रही थी कि घर में रखा सारा अनाज खत्म हो गया था थोड़े बहुत दाने ही बाकी थे। बारिश में खेतों में गिरे अन्न के दाने भी बह गए थे। अगर अब भी कोई इंतजाम न हो पाया तो क्या होगा।
अकेली वही नहीं, चिड़ा भी परेशान था। ईश्वर की कृपा हुई और अगले दिन खुली धूप निकल आई। दोनों बाहर खाना तलाशने के लिए बाहर जाने को तैयार हो गए। जाने से पहले उन्होंने गुनगुन को हिदायत दी
-देखो इस कोटर से बाहर मत निकलना। बाहर बहुत खतरा है इसलिए जब तक हम दोनों लौट कर न आएं यहां से कहीं जाना मत। फिर वे दोनों चले गए।
gungun2गुनगुन को अच्छा नहीं लगा। आखिर ये लोग उसे साथ क्यों नहीं ले गए। उसके पंख मजबूत हैं और मां ने उसे उड़ना भी सिखा दिया था।
उसने कोटर से झांक कर देखा कि बाहर खुली धूप थी…नीला आकाश और आसमान चूमते पहाड़। सारे पेड़ जैसे बारिश से नहा कर नए हो चुके थे। गुनगुन इन सबको करीब से देखना चाहता था। वह धीरे-धीरे बाहर निकला, पंख फैलाए और एक ही झटके में उड़ गया। हल्की हवा चल रही थी और पहाड़ों पर देवदार के पेड़ उसी हवा में सिर हिला रहे थे मानो आपस में बातें कर रहे हों। गुनगुन को अफसोस हो रहा था कि आज तक उसने यह क्यों नहीं देखा था। उसने अपनी उड़ान और तेज की। वह जल्दी से जल्दी सामने वाली पहाड़ी के ऊपर पहुंच जाना चाहता था।

ह ऊपर पहुंचने को ही था कि तभी मुसीबत उसके सिर पर आ गई। एक बड़ी भयानक सी चील उसके ऊपर से उड़ती चली गई। जाहिर था वह किसी और पक्षी का पीछा कर रही थी क्योंकि उसने गुनगुन को नहीं देखा था। यहां गुनगुन के तो होश ही उड़ गए थे। अगर चील ने उसे देख लिया तो एक ही झटके में उसका काम तमाम कर देगी। गुनगुन ने अपनी उड़ान धीमी की और एक पेड़ के नीचे चला गया। वहां एक आधी टूटी मटकी रखी थी। वह उbird5सी में छुप कर बैठ गया। अब रात में वह वापस नहीं जा सकता था। उसे अंधेरे के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था, दूसरे घर का रास्ता किधर से है इसका अंदाजा भी नहीं था।
इधर गुनगुन के माता-पिता अनाज इकट्ठा कर के लाए तो बच्चे को घर से गायब पाया।
– कहां होगा वह, कोई उसे उठा तो नहीं ले गया। पिता परेशान थे।
– नहीं वह उड़ना जानता है अपनी मर्जी से कहीं गया होगा पर अब तो रात हो गई है पता नहीं किस हाल में होगा।
-मैं अंदाजा लगा सकता हूं कि वह सामने वाली पहाड़ी की तरफ गया होगा। चलो वहीं चल कर ढूंढते हैं। दोनों ने कोटर का दरवाजा बंद किया और उड़ गए।
gungun4ऐसा नहीं था कि चील ने गुनगुन को नहीं देखा था पर उसे छोटा शिकार समझ कर आगे चली गई थी और अब वह लौट कर उसे ढूंढ रही थी। दो-तीन चक्कर लगाने के बाद वह वापस हो गई। गुनगुन की आंखों में आंसू आ गए वह जान गया था कि बड़ों का कहना न मान कर उसने गलती की थी…अचानक उसे पिता की आवाज सुनाई दी मां भी साथ थीं। वे उसे लगातार आवाजें दे रहे थे। वह अपनी छिपी हुई जगह से बाहर निकल आया।
-आगे से मैं इस तरह कभी नहीं जाऊंगा उसने रोते हुए कहा।
-कोई बात नहीं…चलो घर चलते हैं कह कर पिता ने उसे अपने साथ लगा लिया। तीनों आसमान में उड़ गए। भले ही रात थी पर चांद की रोशनी काफी थी जल्दी ही वे अपने घर पहुंच गए। उसके बाद फिर गुनगुन ने कोई गलती नहीं की।

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