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भोलू की पतंग

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भोलू एक गरीब परिवार का लड़का था। रहने को एक छोटी सी झोपड़ी थी। वहीं के प्राइमरी स्कूल में पढ़ने जाता था। पिता दिन भर में जो कमाई करते थे उससे रोटी चल जाती थी। वहां से थोड़ी ही दूर पर कॉलोनी थी। वहां के लड़के अक्सर उस मैदान में आकर खेलते थे। अच्छे कपड़े अच्छे जूते पहने वे कभी क्रिकेट खेलते और कभी फुटबॉल। भोलू उन्हें देख कर मन मसोस कर रह जाता। अगले दिन छुट्टी थी, पता नहीं कैसे सारे बच्चों ने पतंग उड़ाने की ठान ली। फिर क्या था सारा आसमान जैसे रंगों से भर गया ढेरों पतंगें बल खाती इठलाती तैर रही थीं।

story of a small boy
story of a small boy

लाल पतंग, हरी पतंग, चांद तारे वाली पतंग और लहरिए वाली पतंग। भोलू चुपचाप अपने घर के सामने बैठा सोच रहा था कि अगर एक भी कट जाती तो वह लूट लेता, पर ऐसा हुआ नहीं… एक दो पतंगें कटीं भी तो जाने कहां चली गईं। वह बड़ी देर तक वहीं बैठा रहा फिर मां ने कुछ काम बता दिया और वह अंदर चला गया।
झोला लेकर सामान लेने के लिए वह निकला ही था कि एक पतंग कट कर उसके सामने से लहराती हुई निकल गई। उसकी डोर लटक रही थी… भोलू ने उचक कर पतंग लपक ली। वह लेकर चलने को ही था कि वह लड़का वहां आ गया जिसकी पतंग थी। उसने भोलू को मारा और पतंग छीन ली। अब भोलू की नाक से खून बह रहा था और चेहरा सूज गया था। झोला लिए वह वहीं बैठ कर रोने लगा तभी उसने एक और लड़के को अपनी तरफ आते देखा और बुरी तरह डर गया। वह उठ कर भागने को था, कि उस लड़के ने उसे रुकने का इशारा किया और मुस्कुराता हुआ उसके पास आ गया।
-तुम्हें पतंग चाहिए न … मेरे पास दो हैं एक तुम ले लो और यह चर्खी भी । उसने पतंग उसके हाथ में थमा दी। यह एक लहरिया वाली पतंग थी लाल पीली लहरियों वाली ।
-पर तुम कैसे उड़ाओगे …?
-मेरे पास और चर्खियां हैं मैं उनमें से कोई ले लूंगा।
-एक काम और कर दो … इस पतंग पर लिख दो कि यह भोलू की पतंग है। मैं अंदर से स्केच पेन लाता हूं। वह अंदर से नीले रंग की स्केच पेन ले आया।
– यह मेरे दोस्त ने दिया था।
आज से मैं भी तुम्हारा दोस्त हूं कह कर उसने पतंग पर सुंदर अक्षरों में लिख दिया – भोलू की पतंग
भोलू ने पतंग डोर से जोड़ी और पलक झपकते ही वह आसमान में पहुंच गई। वे दोनों हंस रहे थे।
-मेरा नाम कमल है… याद रखना। मैं तुमसे मिलता रहूंगा।
-नहीं पक्का दोस्त कमल… भोलू ने हंस कर कहा और झोला लेकर दुकान की तरफ चला गया। हालांकि चोट तो लगी थी पर अब उसे जरा भी दर्द नहीं हो रहा था क्योंकि इसी की वजह से उसे एक अच्छा दोस्त जो मिल गया था।

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