Expand

इंद्र देव के घोड़े

इंद्र देव के घोड़े

- Advertisement -

वे तीन भाई थे, जिनमें छोटा बहुत होशियार था। उसके किसान पिता भी उसका ज्यादा भरोसा करते थे। इसलिए मरने से पहले उन्होंने सारी जमीन-जायदाद छोटे को सौंप दी और कहा कि अपने भाइयों का ख्याल रखना। किसान तो मर गया पर उसके दोनों बड़े बेटे, छोटे भाई से झगड़ने लगे और घर से जाने की धमकी देने लगे। जाते भाइयों के पीछे उन्हें रोकने को छोटा दौड़ा। उन्होंने शर्त लगा दी कि अगर हमारे घोड़ों की देखभाल करने का जिम्मा लो और नौकर की तरह हमारे साथ रहो तो हम तुम्हें ले जा सकते हैं। छोटा भाई अपने भाइयों को नहीं खोना चाहता था इसलिए उसने घर में ताला लगाया और उनके साथ हो लिया। चलते-चलते वे एक ऐसे राज्य में पहुंचे जहां का राजा अपनी एक समस्या से बहुत परेशान था। उसके महल के पीछे एक तालाब था जिसे भरवा कर वह महल बनाना चाहता था, पर कई बार महल बनने के बाद भी अगले दिन वहां तालाब दिखाई देता था और महल गायब होता था। राजा ने ऐलान करवा दिया था कि जो भी इस तालाब वाली जगह पर महल बनवा देगा उसे वह अपना आधा राज्य दे देगा। दोनों भाई बड़े खुश हुए और उन्होंने कहा कि वे ऐसा कर सकते हैं।

brotheसबसे पहले बड़ा भाई गया। राजा ने उससे खजाने से धन लेने को कहा। बड़े भाई ने पैसे लिए दिन भर में महल तैयार करवा दिया और राजा को देखने के लिए बुलाने गया। राजा ने कहा कि अब तो रात हो गई है सुबह देखेंगे। बड़ा भाई घर आकर सो गया। सुबह राजा महल देखने गया, पर वहां तो फिर पानी से भरा हुआ तालाब था। यह देख कर राजा हंस दिए। बड़े भाई को समझ में ही न आया कि रात भर में क्या हो गया था। दूसरे दिन छोटा भाई राजा के पास गया। उसने भी राजा से महल बनाने की बात की राजा ने उसे और भी ज्यादा धन दिया। उसने बेहद मजबूत किले जैसा महल बनाया। शाम तक महल बन कर तैयार हो गया। अपने काम से वह बहुत खुश था। वह राजा को बुलाने गया। राजा ने फिर कहा कि सुबह देखेंगे और सुबह वहां फिर पानी-पानी था। छोटा भाई अपने भाइयों के लिए दुःखी था। अगले दिन वह खुद राजा के पास गया और एक मौका और देने को कहा। राजा को विश्वास तो नहीं था फिर भी उसने उसे उतना ही धन दे दिया। छोटे भाई ने दिन भर काम करवाया और एक मिनट के लिए भी वहां से नहीं हटा। महल बन कर तैयार हो गया पर वह राजा को बुलाने नहीं गया। उसने सोच लिया था कि राजा जब सुबह ही आने को कहता है तो बुलाने क्यों जाना। सारे मजदूर चले गए तो वह वहीं एक पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया। वह देखना चाहता था कि रात को क्या होता है जो अच्छा भला महल तालाब में बदल जाता है।

mehalरात काफी हो गई उसने कई बार देखा, चांदनी रात में महल अब भी वैसा ही चमक रहा था। बारह बजे के बाद अचानक उसने घुंघरुओं की आवाज सुनी। उसने देखा आसमान से तीन घोड़े नीचे की ओर आ रहे थे बीच में सफेद घोड़ा था और उसके अगल-बगल काले तथा भूरे रंग के दो घोड़े थे। आवाज उनके गले में पड़े घुंघरुओं की थी। वे महल की ओर जाएं उससे पहले उस लड़के ने कमर में बंधी रस्सी खोल कर सफेद घोड़े को वहीं बांध लिया। बाकी दोनों घोड़े भी वहीं रुक गए।
-तो तुम लोग हो जो रोज इस महल को तालाब में बदल देते हो…?
-हम इंद्रदेव के घोड़े हैं और रोज यहां पानी पीने आते हैं। यह तालाब हमारा है।
– तो अब नहीं आओगे। अगर महल की तरफ गए तो तुम्हारा यह साथी मेरे पास रहेगा। इसे मैं नहीं जाने दूंगा और कल से इस पर सवारी करूंगा।
-इसे छोड़ दो…हम नीचे नहीं जाएंगे।
-और कभी आना भी मत। कह कर छोटे भाई ने सफेद घोड़े को आजाद कर दिया।
इसके बाद वह घर आकर सो गया और सुबह होने पर राजा को बुलाने गया। राजा वहां आए तालाब की जगह पर एक विशाल महल देख कर बहुत खुश हुए। उन्होंने वादे के अनुसार आधा राज्य उसे दे दिया और साथ में अपनी बेटी का विवाह भी उससे कर दिया। छोटे भाई ने घर की चाबी दोनों भाइयों को सौंप दी कहा कि आप वहां रहना चाहें वहां रहें या फिर मेरे साथ भी रह सकते हैं। वे बिना कुछ कहे चाबी लेकर वापस लौट गए।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Google+ Join us on Google+ Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है