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मछली उत्पादन में गिरावट का कारण विदेशी मेहमान तो नहीं, हो रही स्टडी

उत्पादन में गिरावट को लेकर कोलकाता का रिसर्च सेंटर भी कर रहा स्टडी

मछली उत्पादन में गिरावट का कारण विदेशी मेहमान तो नहीं, हो रही स्टडी

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सुरेश कुमार/कांगड़ा। कुछ साल से हिमाचल में मछली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मछली उत्पादन में गिरावट का कारण विदेशी पक्षी तो नहीं इस बात को लेकर भी विभाग स्टडी कर रहा है। हिमाचल अभी अभी के मुख्य कार्यालय में विशेष बातचीत के दौरान पशुपालन व मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि विदेशी पक्षी बहुत ज्यादा संख्या में यहां आते हैं और यह भी मछली उत्पादन में गिरावट का कारण हो सकता है। इस पर भी स्टडी करवाई जा रही है, ताकि सही जानकारी मिल सकें।
भाखड़ा डैम की बात करें तो यहां पर बड़ा परिवर्तन हुआ है। इस बारे मछुआरों से भी विचार विर्मश किया। प्रारंभिक जांच में जो कारण सामने आए हैं वो यह हैं कि एनटीपीसी ने कॉल डैम बनाया है। जब पानी छोड़ा जाता है तो मछली के प्रजनन में बाधा होती है। दूसरा कारण यह है कि लोग खेतों में बहुत ज्यादा कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। जब पहली बारिश होती है तो जहरीला पानी गोविंद सागर में जाता है। एक कारण यह भी सामने आया है कि फोरलेन की गाद ज्यादा से ज्यादा गोविंद सागर में डाली जा रही है।
अगर विशेष कारण की बात करें तो कांग्रेस के कार्यकाल में जो बीज डाला गया वह सही नहीं था। छोटा डाला गया। कई जगह तो मरा हुआ डाल दिया। विभाग को आदेश दिए हैं कि मछली उत्पादन में गिरावट के कारणों की स्टडी की जाए। कोलकाता में केंद्र का एक रिसर्च सेंटर है उसे भी रिसर्च सौंपी है। रिसर्च सेंटर एक साल में रिपोर्ट देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने छोटे बीज की जगह बड़ा बीज डाला है। 90 लाख से ज्यादा का 60 एमएम और 90 एमएम का बीज डाला है। दो साल में इसके रिजल्ट मिलेंगे।

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