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High Court के Orders की धज्जियां उड़ा रही Bureaucracy

High Court के Orders की धज्जियां उड़ा रही Bureaucracy

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शिमला। प्रदेश के सेब बाहुल्य क्षेत्र में लघु, सीमांत और भूमिहीन किसानों के लिए पांच बीघा तक सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर मानवीय आधार पर राहत प्रदान की गई है। हिमाचल प्रदेश High Court का भी इस पर अंतरिम आदेश आ चुका है। कांग्रेस पार्टी उसका स्वागत करती है, लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश की Bureaucracy हाईकोर्ट के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना कर रही है। छोटे किसानों को राहत देने के लिए ही पूर्व कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2016-17 में यह नीति बनाई थी, जिस पर High Court ने पांच बीघा तक सरकारी भूमि वाले किसानों को राहत प्रदान की है।


वन विभाग की मनमानी कार्रवाई को तत्काल रोका जाए
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Sukhwinder Singh Sukhu ने CM JaI Ram Thakur से मांग की है कि वन विभाग की मनमानी कार्रवाई को तत्काल रोका जाए और हाईकोर्ट के आदेशों पर अमल हो। सुक्खू ने कहा है कि अधिकारी पूर्व सरकार की नीति और High Court के अंतरिम आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं हैं। मनमर्जी से सेब के पौधों पर कुल्हाड़ी चलाकर किसानों को बेदखल किया जा रहा है। इससे किसानों में भय व दहशत का माहौल है। अभी तक जिन भी किसानों की बेदखली हुई है, उनमें अनेक ऐसे किसान हैं जो पूरी तरह से भूमिहीन हो गए हैं। अनुसूचित जाति के अनेक किसानों को भी सरकारी अधिकारियों की कार्रवाई से भूमिहीन होने का दंश झेलना पड़ा है। वन विभाग के दावे कोरे साबित हो रहे हैं। विभाग के अनुसार 28 सौ बीघा भूमि मात्र 13 किसानों के पास है, लेकिन कार्रवाई से अनेक छोटे किसानों पर बेदखली की मार पड़ी है।

सरकार बनी मूकदर्शक छोटे किसानों को कोई राहत नहीं
Sukhu ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है, न तो पूर्व कांग्रेस सरकार की नीति के तहत छोटे किसानों को राहत दे रही है न ही High Court के आदेशों की अनुपालना कराने में दिलचस्पी दिखा रही। CM जयराम ठाकुर गरीब किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए तुरंत प्रभाव से पूरे मामले में हस्तक्षेप करें। पांच बीघा तक सरकारी भूमि वाले किसानों को किसी सूरत में भूमिहीन न किया जाए। सरकारी अधिकारी प्राकृतिक न्याय के नियम को भी कार्रवाई के दौरान अनदेखा कर रहे हैं। High Court के स्टे आर्डर को भी नहीं माना जा रहा, एकतरफा सेब के पौधों का कटान और तानाशाही तरीके से बेदखली की कार्रवाई हो रही है। किसानों का पक्ष भी नहीं सुना जा रहा। इसलिए सीएम तत्काल कड़ा संज्ञान लेते हुए छोटे किसानों को भूमिहीन होने से बचाएं। सीएम स्वयं एक किसान परिवार से संबंध रखते है और छोटे किसानों का दर्द समझते है, वह इस पर मौन न बैठते हुए तुरंत कारवाई करें ।

अवैध कब्जों को नियमित करने की नीति BJP सरकार के समय में ही बनी
Sukhu ने कहा कि CM को यह भी बताना चाहते हैं कि अवैध कब्जों को नियमित करने की नीति बीजेपी सरकार के समय में ही वर्ष 2002 बनाई गई थी। बिना सोचे समझे बनाई गई इस नीति के कारण ही किसान गुमराह हुए और अवैध कब्जे बढ़े। इस नीति के तहत ही कब्जों को नियमित करने की एक लाख 57 हजार फाइलें बनीं। यह ध्यान में रहे कि अगर छोटे किसानों को जल्द राहत प्रदान नहीं की गई तो बेरोजगारी, अराजकता, भूखमरी बढ़ेगी साथ ही किसान अन्य राज्यों की तरह आत्महत्या जैसा कदम उठाने को भी मजबूर हो सकते हैं।

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